एनएचएआई ने ISRO के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र के समन्वय से पहला राष्ट्रीय राजमार्ग हरित आवरण सूचकांक जारी किया है। यह सूचकांक भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के मार्गाधिकार क्षेत्र में हरित आवरण का वैज्ञानिक और मात्रात्मक आकलन करता है। आसान भाषा में, यह राजमार्गों के किनारे पेड़ों और हरियाली की स्थिति को उपग्रह डेटा के आधार पर मापने की कोशिश है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि राजमार्ग गलियारों में वनीकरण की प्रगति कैसी है और पर्यावरणीय अनुपालन पर किस तरह बेहतर नज़र रखी जा सकती है।

परीक्षा में इसे उपग्रह डेटा से हरित आवरण मापने और पर्यावरणीय अनुपालन की निगरानी के उदाहरण के रूप में पढ़ना उपयोगी है। सुदूर संवेदन, वनीकरण और राजमार्ग प्रबंधन के स्टैटिक टॉपिक इससे सीधे जुड़े हैं। अर्थव्यवस्था के संदर्भ में यह राष्ट्रीय राजमार्गों जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा दिखाता है। RAS और UPSC प्रारंभिक परीक्षा में संस्था, सूचकांक का नाम, डेटा स्रोत, उद्देश्य और उपयोग जैसे सीधे तथ्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इसे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, पर्यावरणीय निगरानी और तकनीक-आधारित शासन के उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

स्टैटिक जीके से जोड़कर पढ़ते समय राष्ट्रीय राजमार्ग प्रबंधन, सुदूर संवेदन, उपग्रह-आधारित मैपिंग और पर्यावरणीय अनुपालन जैसे बिंदु महत्वपूर्ण हैं। यह पहल दिखाती है कि सरकारी एजेंसियां अब बड़े भौतिक नेटवर्क की निगरानी में डेटा-आधारित तरीकों का उपयोग बढ़ा रही हैं। इसलिए इसे केवल एक नया सूचकांक मानकर नहीं, बल्कि राजमार्ग विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ पढ़ने वाले उदाहरण के रूप में याद रखना उपयोगी है।