प्रकाशित: 15 फ़रवरी 2026समाचार स्रोतशासन
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने अनुच्छेद 32 के तहत घृणा भाषण याचिका पर सुनवाई से इनकार किया; उच्च न्यायालयों में जाने का निर्देश
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने 16 फरवरी 2026 को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बंगाली मूल के मुसलमानों के खिलाफ कथित घृणा भाषण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अनुच्छेद 32 के तहत हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ताओं को क्षेत्राधिकार वाले उच्च न्यायालयों में जाने का निर्देश दिया।
अनुच्छेद 32 मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार देता है। मुख्य न्यायाधीश के इनकार से यह बात रेखांकित हुई कि न्यायिक पदानुक्रम का पालन किया जाना चाहिए और जिन मामलों को पहले उच्च न्यायालय स्तर पर सुना जा सकता है, उनमें सीधे हस्तक्षेप से बचना चाहिए।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत द्वारा घृणास्पद भाषण याचिका पर अनुच्छेद 32 लागू करने से इनकार तथा इस गारंटीशुदा मौलिक अधिकार के संवैधानिक दायरे पर चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द): 16 फरवरी 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने असम मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के विरुद्ध घृणास्पद भाषण याचिका में अनुच्छेद 32 लागू करने से इनकार कर याचिकाकर्ताओं को उच्च न्यायालयों में जाने का निर्देश दिया। निर्णय ने न्यायिक पदानुक्रम को सुदृढ़ किया, पर अनुच्छेद 32 की गारंटीशुदा स्थिति पर बहस उठाई।
6-अक्ष वर्गीकरण
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
फरवरी 2026 में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ नफरत भरे भाषण से जुड़ी याचिका पर क्या फैसला किया?
**भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत** ने **16 फरवरी 2026** को **बंगाली मूल के मुसलमानों** के खिलाफ **असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा** के कथित नफरत भरे भाषण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर संविधान के **अनुच्छेद 32** के तहत हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 32 क्या है?
भारतीय संविधान का **अनुच्छेद 32** एक **मौलिक अधिकार** है, जो नागरिकों को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए **सीधे सर्वोच्च न्यायालय** जाने का अधिकार देता है। इसे डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने 'संविधान का हृदय और आत्मा' कहा था।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने नफरत भरे भाषण से जुड़े याचिकाकर्ताओं को उच्च न्यायालयों में जाने का निर्देश क्यों दिया?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि संबंधित **उच्च न्यायालय 'प्रभावी रूप से मुद्दों का निर्णय' कर सकते हैं**, इसलिए याचिकाकर्ताओं को अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय आने से पहले उच्च न्यायालय में उपलब्ध उपाय अपनाने चाहिए।
इस याचिका से संबंधित असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर क्या आरोप हैं?
याचिकाओं में असम में **बंगाली मूल के मुसलमानों** के खिलाफ **असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा** के **कथित नफरत भरे भाषण** को चुनौती दी गई। असम में बंगाली भाषी मुस्लिम आबादी बड़ी संख्या में है (मुख्यतः निचले असम में)।
न्यायिक सिद्धांत की दृष्टि से मुख्य न्यायाधीश द्वारा अनुच्छेद 32 के तहत सुनवाई से इनकार करने का क्या महत्व है?
मुख्य न्यायाधीश का इनकार **न्यायिक पदानुक्रम** के सिद्धांत को मजबूत करता है — यानी अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार उन मामलों के लिए है जहाँ उच्च न्यायालय पर्याप्त उपाय नहीं दे सकते। इससे **अनुच्छेद 226 और 227** के तहत उच्च न्यायालयों के क्षेत्राधिकार की भी पुष्टि होती है।