भारतीय मानक ब्यूरो ने बम निपटान प्रणालियों के लिए आईएस 19445:2025 अधिसूचित किया है। यह इस क्षेत्र के लिए भारत का पहला विशेष मानक है। इसे गृह मंत्रालय और DRDO की टर्मिनल बैलिस्टिक रिसर्च लेबोरेटरी के अनुरोध पर विकसित किया गया। इसका मूल उद्देश्य विस्फोटक आयुध निपटान उपकरणों के लिए सुरक्षा और गुणवत्ता के स्पष्ट मानदंड तय करना है।
परीक्षा में आईएस 19445:2025 को तकनीकी मानकीकरण, आंतरिक सुरक्षा खरीद और परीक्षण-प्रमाणन व्यवस्था के उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। बम निपटान प्रणाली केवल एक उपकरण नहीं है, बल्कि इसके मूल्यांकन में पुलिस, सुरक्षा एजेंसियों, रक्षा अनुसंधान, खरीद प्रक्रिया और परीक्षण व्यवस्था की भूमिका भी जुड़ती है। आईएस 19445:2025 बम निपटान प्रणालियों के प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए एक ढांचा देता है, खासकर विस्फोट भार और छर्रों के प्रभाव के संदर्भ में। इसमें परीक्षण उपकरण, परीक्षण क्षेत्र की स्थितियां और मूल्यांकन प्रक्रिया जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण हैं। जब अलग-अलग निर्माता या एजेंसियां ऐसे उपकरणों का मूल्यांकन करती हैं, तो समान मानक होने से प्रमाणन और खरीद में तुलना करना आसान होता है।
इस मानक से खरीद एजेंसियों, निर्माताओं और परीक्षण संस्थाओं को समान कसौटी मिलती है। इससे उपकरणों की विश्वसनीयता, प्रमाणन और खरीद में एकरूपता लाने में मदद मिल सकती है। यह स्वैच्छिक रूप से अपनाने के लिए बनाया गया मानक है, इसलिए इसका महत्व सरकारी खरीद, परीक्षण संस्थाओं और उद्योग में गुणवत्ता-आधारित निर्माण से भी जुड़ता है। स्टैटिक जीके के लिए भारतीय मानक ब्यूरो, गृह मंत्रालय, DRDO और सुरक्षा उपकरणों के मानकीकरण की भूमिका याद रखनी चाहिए। प्रीलिम्स में मानक का नाम, उद्देश्य और संबंधित संस्थाएं पूछी जा सकती हैं। मुख्य परीक्षा में यह उदाहरण आंतरिक सुरक्षा क्षमता, तकनीकी मानकीकरण और सार्वजनिक सुरक्षा तंत्र की गुणवत्ता सुधार से जोड़ा जा सकता है।
