नवंबर 2025 में पंजाब संशोधित भारतनेट योजना को पूरे राज्य में लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बना। इसका मुख्य संदेश यह है कि ग्रामीण डिजिटल ढांचे को केवल तार बिछाने की परियोजना की तरह नहीं, बल्कि सेवाएं पहुंचाने, ई-स्वास्थ्य सेवाओं और ई-शासन से जुड़ी बुनियादी सुविधा की तरह समझना चाहिए। पंजाब में यह काम अमृतसर के हरशा छीना ब्लॉक से शुरू हुआ और 22 ब्लॉकों तक बढ़ा। लगभग 1,000 किमी क्षैतिज दिशात्मक ड्रिलिंग और 400 किमी ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने का काम दर्ज किया गया। पंजाब परियोजना के तहत कार्यात्मक राज्य नेटवर्क संचालन केंद्र वाला पहला राज्य भी बताया गया है, इसलिए नेटवर्क की निगरानी और संचालन का पहलू भी परीक्षा में पूछा जा सकता है।

भारतनेट का व्यापक उद्देश्य देश की ग्राम पंचायतों तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाना है, ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं, ई-शिक्षा और ई-शासन जैसी सुविधाएं बेहतर ढंग से चल सकें। परीक्षा की दृष्टि से इसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के सूचना-संचार ढांचे, ग्रामीण विकास, सेवाएं पहुंचाने और शासन सुधार से जोड़कर पढ़ना उपयोगी है। प्रारंभिक परीक्षा में पंजाब की पहली उपलब्धि, हरशा छीना से शुरुआत, 22 ब्लॉक, 1,000 किमी ड्रिलिंग, 400 किमी ऑप्टिकल फाइबर केबल और राज्य नेटवर्क संचालन केंद्र जैसे सीधे तथ्य पूछे जा सकते हैं।

राजस्थान के लिए यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में भारतनेट का विस्तार अभी भी नीति और क्रियान्वयन की चुनौती बना हुआ है। अप्रैल 2026 के पीआईबी आंकड़ों में राजस्थान के लिए 11,071 ग्राम पंचायतों और सेवाएं शुरू करने के लिए तैयार 8,997 बिंदुओं का उल्लेख मिलता है। इसलिए RAS/UPSC अभ्यर्थियों को पंजाब की उपलब्धि की तुलना राजस्थान की डिजिटल कनेक्टिविटी, पंचायत-स्तर की सेवाओं और ग्रामीण शासन से करके पढ़ना चाहिए। मुख्य परीक्षा में यह उदाहरण डिजिटल डिवाइड घटाने, अंतिम छोर तक सेवाएं पहुंचाने और पंचायत स्तर पर इंटरनेट-आधारित प्रशासन को मजबूत करने के संदर्भ में उपयोगी है।