लगातार दूसरे वर्ष, भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून में सितंबर 2025 में अपेक्षा से अधिक बारिश हुई। हरियाणा में तीन वर्षों का सबसे गीला सितंबर दर्ज किया गया, कई जिलों में 300% से अधिक अतिरिक्त बारिश हुई। IMD ने पुष्टि की कि सितंबर की शुरुआत तक कुल संचयी वर्षा दीर्घकालिक औसत से 8% अधिक थी। सामान्य से अधिक बारिश से खरीफ फसल उत्पादन, विशेषकर चावल, दालें और तिलहन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। राजस्थान के पश्चिमी जिलों में भी सामान्य से अधिक बारिश हुई, जैसलमेर और बाड़मेर में जल स्तर में सुधार हुआ।
भारत में लगातार दूसरे वर्ष मानसून में सामान्य से अधिक बारिश हुई
भारत में लगातार दूसरे वर्ष मानसूनी बारिश सामान्य से अधिक; हरियाणा में 3 वर्षों में सबसे अधिक वर्षा वाला सितंबर।
मुख्य तथ्य
- भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने सितंबर 2025 में लगातार दूसरे वर्ष सामान्य से अधिक वर्षा दी; संचयी वर्षा दीर्घावधि औसत से 8% अधिक रही।
- हरियाणा में सितंबर में तीन वर्षों की सबसे अधिक वर्षा हुई, और कई जिलों में 300% से अधिक अतिरिक्त वर्षा दर्ज की गई।
- सामान्य से अधिक वर्षा से खरीफ फसल उत्पादन (चावल, दालें, तेलहन) बढ़ने, कृषि क्षेत्र को बल मिलने और ग्रामीण मांग बढ़ने की उम्मीद है।
- राजस्थान के पश्चिमी जिलों में काफी अधिक वर्षा हुई, जैसलमेर और बाड़मेर में भूजल स्तर में सुधार हुआ; IMD ने बिहार, पश्चिम बंगाल और असम के लिए बाढ़ चेतावनी जारी की।
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सरकारी पहलों के तहत सितंबर 2024 से कितनी जल संरक्षण संरचनाएं बनाई गई हैं?
सितंबर 2024 से सामुदायिक भागीदारी और सरकारी सहायता से देशभर में 45 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं बनाई गई हैं।
स्रोत: IMD
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2025 में भारत का मानसून कैसा रहा और सामान्य से अधिक वर्षा का क्या महत्व है?
**2025 का भारत का मानसून** **लगातार दूसरे वर्ष सामान्य से अधिक वर्षा** वाला रहा, जिससे कृषि, भूजल पुनर्भरण और जलाशयों के स्तर को लाभ मिलता है।
भारत के मानसून के लिए दीर्घकालिक औसत (LPA) क्या है?
**दीर्घकालिक औसत (LPA)** 50 वर्षों में औसत मानसून वर्षा है (वर्तमान में **880.6 मिमी**)। **IMD** मानसून को: अपर्याप्त (<90%), सामान्य (96-104%), सामान्य से अधिक (>104-110%) के रूप में वर्गीकृत करता है।
सामान्य से अधिक मानसून भारतीय कृषि और खाद्य सुरक्षा पर कैसे प्रभाव डालता है?
**सामान्य से अधिक मानसून** से **खरीफ फसल** उत्पादन, **जलाशय भंडारण**, **भूजल पुनर्भरण**, कम **खाद्य मुद्रास्फीति** और **ग्रामीण उपभोग** में सुधार होता है।
एल नीनो और ला नीना क्या हैं और ये भारत के मानसून को कैसे प्रभावित करते हैं?
**एल नीनो** (प्रशांत महासागर का गर्म होना) भारत के मानसून को **कमजोर** करता है। **ला नीना** (प्रशांत का ठंडा होना) मानसून को **मजबूत** करता है। 2025 का सामान्य से अधिक मानसून आंशिक रूप से ला नीना पैटर्न से था।
दक्षिण-पश्चिम मानसून क्या है और भारत की अर्थव्यवस्था के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?
**दक्षिण-पश्चिम मानसून** (जून-सितंबर) से भारत में **~70-80% वार्षिक वर्षा** होती है और यह कृषि, जलाशय भरने तथा भूजल पुनर्भरण के लिए महत्वपूर्ण है।
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