भारत 1 जनवरी 2026 से किम्बरली प्रक्रिया की अध्यक्षता संभालेगा। संयुक्त अरब अमीरात से पदभार लेने के बाद यह भारत का तीसरा अध्यक्षता कार्यकाल होगा। भारत 25 दिसंबर 2025 से उपाध्यक्ष की भूमिका भी संभालेगा, इसलिए यह बदलाव परीक्षा की दृष्टि से तारीख, संस्था और भारत की भूमिका तीनों स्तरों पर महत्वपूर्ण है।
किम्बरली प्रक्रिया सरकारों, अंतरराष्ट्रीय हीरा उद्योग और नागरिक समाज की त्रिपक्षीय पहल है। इसका उद्देश्य संघर्ष से जुड़े हीरों के व्यापार को रोकना है। यह व्यवस्था वैश्विक स्तर पर 60 प्रतिभागियों के सहयोग से चलती है; यूरोपीय संघ और उसके सदस्य देशों को एक प्रतिभागी माना जाता है। इसलिए प्रीलिम्स में इससे जुड़े सवाल संस्था की प्रकृति, प्रतिभागियों की संख्या और त्रिपक्षीय संरचना पर आ सकते हैं।
भारत की अध्यक्षता का फोकस शासन और अनुपालन, डिजिटल प्रमाणन, पता लगाने की क्षमता, पारदर्शिता और संघर्ष-मुक्त हीरों पर उपभोक्ता भरोसा बढ़ाने पर रहेगा। स्टैटिक जीके में इसे वैश्विक व्यापार व्यवस्था, प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग और नागरिक समाज की भूमिका से जोड़कर पढ़ा जा सकता है। RAS और UPSC जैसी परीक्षाओं में यह तथ्य-आधारित प्रीलिम्स प्रश्नों के साथ मुख्य परीक्षा में नैतिक व्यापार, पारदर्शिता और बहु-हितधारक शासन की चर्चा के लिए भी उपयोगी है। चूंकि यह अपडेट RAS, UPSC सहित कई परीक्षाओं के लिए उपयोगी है, अभ्यर्थियों को इसे केवल एक अंतरराष्ट्रीय संस्था के नाम के रूप में नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक आर्थिक भूमिका, अनुपालन व्यवस्था और भरोसेमंद व्यापार मानकों से जुड़े उदाहरण के रूप में पढ़ना चाहिए।
