प्रकाशित: 18 जनवरी 2026अर्थव्यवस्था
भारत की जैव-अर्थव्यवस्था $166 अरब तक पहुँची — एक दशक में 16 गुना वृद्धि
भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2014 के $10 अरब से बढ़कर 2026 तक $166 अरब हो गई। इस तरह एक दशक में इसमें 16 गुना वृद्धि हुई। इस बाज़ार में जैव-औद्योगिक क्षेत्र की हिस्सेदारी 47%, जैव-फार्मा की 35%, जैव-अनुसंधान और सूचना प्रौद्योगिकी की 9% तथा जैव-कृषि की 8% है। देशभर में 11,800 से अधिक जैव-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप इस क्षेत्र को आगे बढ़ा रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को जितने टीकों की ज़रूरत होती है, उनमें से 65% भारत उपलब्ध कराता है। इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ने 20% मिश्रण (E20) का लक्ष्य 2025 में हासिल कर लिया, जो तय समय से 5 वर्ष पहले था। गुजरात राज्य जैव-प्रौद्योगिकी मिशन के तहत गुजरात के गांधीनगर में जैव-सुरक्षा स्तर 4 (BSL-4) की नई जैव-संरोध सुविधा विकसित की जा रही है। पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) में ऐसी सुविधा पहले से मौजूद है। इससे भारत वैश्विक जैव-अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख भागीदार बन रहा है।
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Tऔद्योगिक विकास एवं आर्थिक सुधार
Tआर्थिक विकास एवं सतत विकास
Tआनुवंशिकी, जैव प्रौद्योगिकी एवं नैनो प्रौद्योगिकी
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में भारत की जैव-अर्थव्यवस्था का आकार कितना है?
भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2014 के **$10 अरब** से बढ़कर **2026 तक $166 अरब** हो गई। इस तरह इसमें **16 गुना वृद्धि** हुई।
भारत की जैव-अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्र कौन-से हैं?
भारत की जैव-अर्थव्यवस्था में **जैव-औद्योगिक क्षेत्र की हिस्सेदारी 47%**, जैव-फार्मा की 35%, जैव-अनुसंधान और सूचना प्रौद्योगिकी की 9% तथा जैव-कृषि की 8% है।
2026 में भारत में कितने जैव-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप हैं?
भारत में 2026 तक **11,000 से अधिक जैव-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप** हैं, जबकि 2014 में इनकी संख्या सिर्फ़ 50 थी।
दुनिया के कितने प्रतिशत टीकों की आपूर्ति भारत करता है?
भारत **दुनिया के 65% टीकों की आपूर्ति** करता है। इससे वैश्विक जैव-फार्मा और जन-स्वास्थ्य में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
2014 से 2026 के बीच भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 16 गुना कैसे बढ़ी?
**अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोज़गार के लिए जैव-प्रौद्योगिकी (BioE3) नीति, मेक इन इंडिया** तथा स्टार्टअप परिवेश के विस्तार से भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2014 के $10 अरब से बढ़कर 2026 में $166 अरब हो गई। इसी अवधि में जैव-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप की संख्या 50 से बढ़कर 11,000 से अधिक हो गई।