भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2014 में $10 अरब से बढ़कर 2026 तक $166 अरब हो गई, यानी एक दशक में 16 गुना वृद्धि हुई। बाजार जैव-औद्योगिक (47%), जैव-फार्मा (35%), जैव-अनुसंधान एवं IT (9%) और जैव-कृषि (8%) क्षेत्रों में बंटा है। देश में 11,800 से अधिक जैव-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप हैं।

भारतीय कंपनियों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा खरीदे गए टीकों की 40% आपूर्ति की। इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ने 2025 में 20% (E20) लक्ष्य हासिल किया, निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले। गांधीनगर, गुजरात में नई BSL-4 बायो-कंटेनमेंट सुविधा विकसित हो रही है। इससे भारत एक प्रमुख वैश्विक जैव-अर्थव्यवस्था शक्ति के रूप में उभर रहा है।