प्रकाशित: 10 सितंबर 2025अर्थव्यवस्था
UK-भारत अवसंरचना वित्तपोषण सेतु (UKIIFB) की पहली वर्षगाँठ
12 सितंबर 2023 को शुरू हुई प्रक्रिया के बाद सितंबर 2024 में स्थापित ब्रिटेन-भारत अवसंरचना वित्तपोषण सेतु (UKIIFB) ने अपना पहला वर्ष पूरा किया। नीति आयोग और सिटी ऑफ लंदन कॉर्पोरेशन की इस साझेदारी का उद्देश्य भारत में टिकाऊ अवसंरचना के लिए निजी पूँजी जुटाना है।
UKIIFB ने हरित बॉन्ड, जलवायु वित्त और शहरी अवसंरचना के वित्तपोषण पर संवाद को आगे बढ़ाया है। इसका उद्देश्य भारत की ₹111 लाख करोड़ की अवसंरचना पाइपलाइन में ब्रिटेन के संस्थागत निवेशकों को आकर्षित करना है। यह पहल राजस्थान की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से बाड़मेर और जैसलमेर के उन सौर पार्कों के लिए जिन्हें अंतरराष्ट्रीय हरित वित्त की आवश्यकता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ब्रिटेन-भारत अवसंरचना वित्तपोषण सेतु (UKIIFB) क्या है?
ब्रिटेन-भारत अवसंरचना वित्तपोषण सेतु (UKIIFB), नीति आयोग और सिटी ऑफ लंदन कॉर्पोरेशन की साझेदारी है। यह भारत की अवसंरचना परियोजनाओं के लिए ब्रिटिश पूँजी जुटाने वाला भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय तंत्र है।
UKIIFB ने अपने पहले वर्ष तक क्या हासिल किया?
UKIIFB का उद्देश्य भारत में टिकाऊ अवसंरचना के लिए निजी पूँजी जुटाना है। अपने पहले वर्ष तक इसने भारत के अवसंरचना क्षेत्रों के लिए ब्रिटेन से निवेश की महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएँ जुटाने में मदद की।
UKIIFB भारत में ब्रिटेन के निवेश के लिए किन क्षेत्रों पर ध्यान देता है?
यह पहल हरित बॉन्ड, जलवायु वित्त और शहरी अवसंरचना के वित्तपोषण पर संवाद को आगे बढ़ाती है। स्वच्छ ऊर्जा, परिवहन अवसंरचना, शहरी विकास और डिजिटल अवसंरचना इसके प्राथमिक क्षेत्र हैं।
UKIIFB भारत-ब्रिटेन आर्थिक संबंधों को कैसे मज़बूत करता है?
UKIIFB का उद्देश्य भारत की ₹111 लाख करोड़ की अवसंरचना पाइपलाइन में ब्रिटेन के संस्थागत निवेशकों को आकर्षित करना है। यह भारत के अवसंरचना कार्यक्रम से ब्रिटिश वित्तीय विशेषज्ञता और पूँजी को जोड़ता है तथा द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करता है।
UKIIFB की स्थापना कब हुई और इसका दीर्घकालिक लक्ष्य क्या है?
UKIIFB से जुड़ी प्रक्रिया 12 सितंबर 2023 को शुरू हुई और सितंबर 2024 में पत्रों के आदान-प्रदान के साथ यह साझेदारी स्थापित हुई। इसका दीर्घकालिक लक्ष्य भारत के लिए अरबों का ब्रिटिश निवेश जुटाना है। यह राजस्थान की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से बाड़मेर और जैसलमेर के उन सौर पार्कों के लिए जिन्हें अंतरराष्ट्रीय हरित वित्त की आवश्यकता है।