भारत के राष्ट्रपति ने विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम, 2025 को मंज़ूरी दी। इसे आम तौर पर ग्राम अधिनियम कहा जाता है। यह कानून महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम, 2005 (मनरेगा) की जगह लेता है और ग्रामीण रोज़गार को आजीविका सुरक्षा, संपत्ति निर्माण तथा जलवायु जोखिमों से निपटने की क्षमता बढ़ाने के समेकित साधन के रूप में स्थापित करता है।

नई व्यवस्था में पारंपरिक मांग-आधारित मज़दूरी रोज़गार के साथ कौशल-आधारित रोज़गार के प्रावधान भी जोड़े गए हैं। इसमें अन्य ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के साथ अभिसरण की व्यवस्था है और इसके तहत बनाई गई हर संपत्ति की जियो-टैगिंग अनिवार्य है। अधिनियम दैनिक मज़दूरी की अधिकतम सीमा भी बढ़ाता है और मज़दूरी दरों में संशोधन के लिए तिमाही समीक्षा की व्यवस्था करता है।