RAS प्रश्न
भारत की परमाणु ऊर्जा रणनीति में थोरियम का क्या महत्व है?
सही उत्तर: (A) भारत के पास विश्व का सबसे बड़ा थोरियम भंडार है और वह इसे अपने परमाणु कार्यक्रम के चरण 3 में उपयोग करने की योजना बना रहा है।
भारत की परमाणु ऊर्जा रणनीति में थोरियम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत के पास इसका बहुत बड़ा भंडार है और परमाणु कार्यक्रम के चरण 3 में इसे ऊर्जा स्रोत के रूप में उपयोग करने की योजना है।
व्याख्या
भारत के पास विश्व के थोरियम भंडार का लगभग 25% यानी अनुमानित 9,63,000 टन थोरियम है, जो मुख्य रूप से केरल और ओडिशा तटों की मोनाज़ाइट रेत में पाया जाता है। पत्र सूचना कार्यालय के अनुसार भारत सरकार भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के तीसरे चरण को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है और थोरियम का बड़े पैमाने पर उपयोग इसी चरण में सोचा गया है। प्राकृतिक थोरियम में स्वयं कोई विखंडनीय समस्थानिक नहीं होता; इसलिए इसे सीधे ईंधन की तरह नहीं चलाया जाता, बल्कि थोरियम-232 को विखंडनीय यूरेनियम-233 में बदला जाता है। AHWR को थोरियम-आधारित ईंधन के बड़े पैमाने पर प्रयोग का तकनीकी प्रदर्शन माना गया है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) थोरियम शीतलक नहीं है; यह ईंधन-स्रोत है, जबकि शीतलक के रूप में भारी जल या सोडियम जैसे माध्यम उपयोग होते हैं।
- (C) भारत के परमाणु कार्यक्रम में थोरियम की स्पष्ट भूमिका है, क्योंकि पत्र सूचना कार्यालय इसे तीसरे चरण में ऊर्जा स्रोत के रूप में उपयोग करने की परिकल्पना से जोड़ता है।
- (D) थोरियम को हथियारों के लिए निर्यात करने की बात नहीं है; इसे भारत की ऊर्जा रणनीति के लिए रणनीतिक भंडार माना गया है।
अवधारणा
भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम और ईंधन-चक्र में थोरियम की भूमिका अहम है। RAS में विज्ञान-प्रौद्योगिकी के तहत ऊर्जा सुरक्षा, स्वदेशी संसाधन और रणनीतिक खनिज बार-बार पूछे जाते हैं।
