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RAS प्रश्न

GSLV Mk-II और GSLV Mk-III (LVM3) में मुख्य अंतर क्या है?

सही उत्तर: (C) GSLV Mk-III में स्वदेशी क्रायोजेनिक ऊपरी चरण (C25) है जिसकी पेलोड क्षमता अधिक है।

GSLV Mk-III, जिसे अब LVM3 कहा जाता है, GSLV Mk-II की तुलना में स्वदेशी C25 क्रायोजेनिक ऊपरी चरण और अधिक पेलोड क्षमता वाला प्रक्षेपण यान है।

  1. (A)

    GSLV Mk-III केवल ध्रुवीय कक्षा मिशनों के लिए है

  2. (B)

    GSLV Mk-III स्ट्रैप-ऑन बूस्टर का उपयोग नहीं करता

  3. (C)

    GSLV Mk-III में स्वदेशी क्रायोजेनिक ऊपरी चरण (C25) है जिसकी पेलोड क्षमता अधिक है

  4. (D)

    GSLV Mk-III केवल ठोस प्रणोदन का उपयोग करता है

व्याख्या

मुख्य अंतर क्रायोजेनिक ऊपरी चरण और उससे जुड़ी वहन क्षमता में है। GSLV Mk-II अपने CUS के साथ GTO में 2,500 किग्रा तक पहुंचा सकता है, जबकि GSLV Mk-III यानी LVM3 स्वदेशी C25 क्रायोजेनिक ऊपरी चरण के साथ GTO में 4,000 किग्रा तक ले जा सकता है। ISRO के प्रक्षेपण यान पृष्ठ पर LVM3 अगली पीढ़ी का प्रक्षेपण यान है, जो 4 टन वर्ग के संचार उपग्रहों और LEO में 10 टन वर्ग के पेलोड को प्रक्षेपित कर सकता है। LVM3 में C25 क्रायोजेनिक चरण सहित स्वदेशी तकनीकें शामिल हैं। इसलिए सही फर्क अधिक शक्तिशाली क्रायोजेनिक चरण और अधिक क्षमता का है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) LVM3 को केवल ध्रुवीय कक्षा मिशनों तक सीमित बताना गलत है, क्योंकि उसकी GTO में 4,000 किग्रा तक पेलोड ले जाने की क्षमता है।
  • (B) यह विकल्प गलत है, क्योंकि GSLV Mk-III दो S200 ठोस स्ट्रैप-ऑन बूस्टर का उपयोग करता है।
  • (D) GSLV Mk-III को केवल ठोस प्रणोदन वाला बताना गलत है, क्योंकि उसमें ठोस चरणों के साथ तरल और क्रायोजेनिक चरण भी शामिल हैं।

अवधारणा

यह प्रश्न अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में प्रक्षेपण यानों की क्षमता, चरणों और स्वदेशी क्रायोजेनिक तकनीक की समझ जांचता है। RAS में ऐसे तथ्य इसलिए बार-बार आते हैं, क्योंकि ISRO की प्रक्षेपण क्षमता विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी खंड की सीधी परीक्षा-योग्य सामग्री है।

स्रोत

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