RAS प्रश्न
भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा 3(d) महत्वपूर्ण है क्योंकि यह:
सही उत्तर: (C) बढ़ी हुई प्रभावकारिता की शर्त रखकर फार्मास्यूटिकल पेटेंट की 'एवरग्रीनिंग' रोकती है।
भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा 3(d) ज्ञात पदार्थ के नए रूप पर पेटेंट तभी मानती है जब उससे उस पदार्थ की ज्ञात प्रभावकारिता में वास्तविक बढ़ोतरी साबित हो, इसलिए यह दवा पेटेंट की एवरग्रीनिंग रोकती है।
व्याख्या
धारा 3(d) का केंद्र यही है कि ज्ञात पदार्थ के केवल नए रूप, नई संपत्ति या नए उपयोग को अपने-आप आविष्कार नहीं माना जाएगा। India Code पर उपलब्ध भारतीय पेटेंट अधिनियम, 1970 के पाठ में साफ है कि ज्ञात पदार्थ के लवण, एस्टर, ईथर, पॉलिमॉर्फ, मेटाबोलाइट, शुद्ध रूप, कण आकार, आइसोमर, मिश्रण, कॉम्प्लेक्स, संयोजन और अन्य व्युत्पन्न उसी पदार्थ जैसे माने जाएंगे, जब तक वे प्रभावकारिता से जुड़ी विशेषताओं में महत्वपूर्ण अंतर न दिखाएँ। इसी कारण यह धारा दवा कंपनियों को पुराने पदार्थ में मामूली बदलाव करके पेटेंट अवधि बढ़ाने से रोकती है। नोवार्टिस बनाम भारत संघ (2013) में ग्लीवेक के पेटेंट को अस्वीकार करते हुए इसी कसौटी को बरकरार रखा गया।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) धारा 3(d) सभी दवा पेटेंट पर रोक नहीं लगाती; वह केवल ज्ञात पदार्थ के ऐसे नए रूपों को रोकती है जिनसे प्रभावकारिता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी सिद्ध नहीं होती।
- (B) यह धारा सभी पेटेंट की अनुमति देने वाली व्यवस्था नहीं है, बल्कि अधिनियम की धारा 3 में उन बातों को रखती है जिन्हें आविष्कार नहीं माना जाएगा।
- (D) धारा 3(d) केवल सूचना-प्रौद्योगिकी पेटेंट तक सीमित नहीं है; उसका पाठ ज्ञात पदार्थ, ज्ञात प्रक्रिया और उनसे जुड़े नए रूप या उपयोग की पेटेंट-योग्यता पर बात करता है।
अवधारणा
यह प्रश्न बौद्धिक संपदा अधिकार, पेटेंट-योग्यता और सार्वजनिक स्वास्थ्य के संतुलन को जांचता है। RAS में यह इसलिए बार-बार आता है क्योंकि विज्ञान-प्रौद्योगिकी में कानून, दवा-उपलब्धता और नीति-निर्णय एक साथ जुड़ते हैं।
