RAS प्रश्न
एमआरएनए टीके किस प्रकार काम करते हैं?
सही उत्तर: (D) मैसेंजर RNA डालकर, जो कोशिकाओं को वायरल प्रोटीन बनाने का निर्देश देता है और इससे प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा होती है।
एमआरएनए टीके कोशिकाओं में ऐसा मैसेंजर आरएनए पहुंचाते हैं जो उन्हें वायरस का प्रोटीन बनाने का निर्देश देता है, और यही प्रोटीन प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया शुरू करता है।
व्याख्या
एमआरएनए टीकों में मैसेंजर आरएनए की ऐसी शृंखलाएं होती हैं जो एंटीजन कोड करती हैं और लिपिड आवरण के भीतर पहुंचाई जाती हैं। कोशिका के भीतर पहुंचने के बाद यही एमआरएनए प्रोटीन एंटीजन में अनुवादित होता है। यह निर्देश मानव कोशिकाओं को SARS-CoV-2 स्पाइक प्रोटीन का हिस्सा बनाने के लिए होता है। शरीर इस बने हुए स्पाइक प्रोटीन को पहचानता है और उसके विरुद्ध प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया विकसित करता है। इसी प्रक्रिया से टी-हेल्पर कोशिकाएं, साइटोटॉक्सिक टी-कोशिकाएं और एंटीबॉडी प्रेरित होती हैं। इसलिए एमआरएनए टीके तैयार एंटीबॉडी या जीवित वायरस नहीं देते, बल्कि शरीर को स्वयं लक्षित वायरस प्रोटीन बनवाकर प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रशिक्षित करते हैं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) एमआरएनए टीकों में जीवाणु डीएनए का उपयोग नहीं होता; इनमें एंटीजन-कोडिंग मैसेंजर आरएनए होता है।
- (B) ये टीके तैयार एंटीबॉडी शरीर में नहीं डालते, बल्कि कोशिकाओं में बने प्रोटीन एंटीजन के कारण शरीर में एंटीबॉडी और अन्य प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया प्रेरित होती है।
- (C) एमआरएनए टीके कमजोर जीवित वायरस नहीं डालते; वे लिपिड आवरण में पहुंचाए गए एमआरएनए से कोशिका को प्रोटीन एंटीजन बनाने का निर्देश देते हैं।
अवधारणा
यह प्रश्न टीका-प्रौद्योगिकी और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया की मूल समझ जांचता है। आरएएस में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के ऐसे प्रश्न बार-बार आते हैं क्योंकि वे नई तकनीक को बुनियादी जैविक प्रक्रिया से जोड़कर पूछते हैं।
