RAS प्रश्न
हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत कहता है कि:
सही उत्तर: (B) एक कण की स्थिति और संवेग दोनों एक साथ सटीक रूप से ज्ञात नहीं हो सकते।
हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत बताता है कि किसी कण की स्थिति और संवेग दोनों को एक ही समय पर पूरी सटीकता से नहीं जाना जा सकता।
व्याख्या
हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत क्वांटम यांत्रिकी का मूल विचार है। दिए गए संबंध Δx·Δp ≥ ℏ/2 का अर्थ है कि कण की स्थिति जितनी अधिक सटीक ज्ञात होगी, उसका संवेग उतना ही कम सटीक ज्ञात होगा, और उलटा भी सही है। ई-ज्ञानकोश के स्रोत में भी यही बात स्पष्ट है कि स्थिति और संवेग को मनमानी ऊंची सटीकता से एक साथ नहीं मापा जा सकता। यह यंत्रों की कमी या खराब विधि की बात नहीं है, बल्कि सूक्ष्म कणों की प्रकृति से जुड़ी सीमा है। इसी कारण इलेक्ट्रॉन को निश्चित कक्षा में घूमती वस्तु की तरह नहीं, बल्कि प्रायिकता-आधारित कक्षक के रूप में समझा जाता है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) प्रकाश का सीधी रेखा में चलना प्रकाशिकी से जुड़ा कथन है; यह कण की स्थिति और संवेग की संयुक्त सटीकता पर कोई सीमा नहीं बताता।
- (C) ऊर्जा संरक्षण एक अलग सामान्य भौतिक सिद्धांत है; हाइजेनबर्ग का सिद्धांत स्थिति-संवेग जैसी पूरक राशियों की अनिश्चितता पर है।
- (D) इलेक्ट्रॉन के निश्चित कक्षाओं में चलने का विचार इस सिद्धांत से मेल नहीं खाता, क्योंकि यहां इलेक्ट्रॉन कक्षक को प्रायिकता बादल की तरह समझाया गया है।
अवधारणा
यह प्रश्न क्वांटम यांत्रिकी में अनिश्चितता सिद्धांत की मूल समझ जांचता है। RAS में यह इसलिए बार-बार उपयोगी है क्योंकि आधुनिक भौतिकी के प्रश्न अक्सर सिद्धांत, सूत्र और उनके सीधे अर्थ पर आधारित होते हैं।
