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RAS प्रश्न

DRDO के DGRE और ISRO के SAC ने फरवरी 2026 में एक MoU पर हस्ताक्षर किए। DGRE (रक्षा भूसूचना अनुसंधान प्रतिष्ठान) का मुख्य कार्यक्षेत्र क्या है?

सही उत्तर: (B) हिमालयी अभियानों में भारतीय सेना को हिम, भूभाग और मौसम की रियल-टाइम जानकारी देना।

रक्षा भू-सूचना अनुसंधान प्रतिष्ठान (DGRE) का मुख्य दायित्व हिमालयी क्षेत्र में भारतीय सेना की अभियान संबंधी ज़रूरतों के लिए हिम, भूभाग और मौसम की विशेष जानकारी तुरंत उपलब्ध कराना है।

  1. (A)

    उपग्रह-रोधी हथियारों और साइबर युद्ध क्षमताओं का विकास

  2. (B)

    हिमालयी अभियानों में भारतीय सेना को हिम, भूभाग और मौसम की रियल-टाइम जानकारी देना

  3. (C)

    वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए उपग्रह प्रक्षेपण वाहनों का निर्माण

  4. (D)

    नौसैनिक उपयोगों के लिए समुद्र विज्ञान अनुसंधान

व्याख्या

DGRE, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की चंडीगढ़ स्थित प्रयोगशाला है। यह ऊँचाई वाले क्षेत्रों में अभियानों के लिए भू-सूचना विज्ञान से मदद देती है; इसका काम सामान्य हथियार या अंतरिक्ष उपकरण बनाना नहीं है। यह भारतीय सेना को हिमालय में अभियानों के लिए हिम, भूभाग और मौसम के विशेष आँकड़े तुरंत उपलब्ध कराती है और उनसे ऐसी जानकारी तैयार करती है जिसका सेना सीधे इस्तेमाल कर सके। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के DRDO के काम के तहत DGRE भू-जोखिमों के लिए भूभाग और हिम के मापदंड तय करने, रिमोट सेंसिंग से हिम आवरण और हिम-परत की पहचान करने, हिमस्खलन की संयुक्त चेतावनी और दिशा-निर्देशन देने, हिम-परत का मॉडल बनाने, हिमस्खलन का पूर्वानुमान लगाने तथा उसका तुरंत पता लगाकर निगरानी करने का काम करता है। इस संस्थान का मूल काम सेना को पहाड़ी इलाकों की ऐसी जानकारी देना है जिसे वह अपने अभियानों में सीधे इस्तेमाल कर सके। इसलिए विकल्प B सही है।

बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं

  • (A) उपग्रह-विरोधी हथियार और साइबर युद्ध DGRE के कार्यक्षेत्र से बाहर हैं, क्योंकि इसका काम हिमालयी अभियानों के लिए हिम, भूभाग, मौसम, भू-जोखिम और हिमस्खलन की जानकारी देना है।
  • (C) वाणिज्यिक उपग्रह प्रक्षेपण यान बनाना DGRE का काम नहीं है। DRDO ने DGRE को प्राकृतिक आपदाओं और भू-सूचना विज्ञान से जुड़े उन कामों की ज़िम्मेदारी दी है जिनमें हिम-परत, भूभाग और हिमस्खलन शामिल हैं।
  • (D) DGRE का काम हिमालयी हिम, भूभाग, मौसम और हिमस्खलन की स्थितियों से जुड़ा है; इसलिए नौसेना के लिए समुद्र-विज्ञान संबंधी शोध उसके कार्यक्षेत्र से बाहर है।

अवधारणा

रक्षा-विज्ञान संस्थानों का काम अक्सर व्यावहारिक ज़रूरतें पूरी करना होता है। खासकर DRDO की प्रयोगशालाएँ चर्चित हथियार कार्यक्रमों के बजाय सेनाओं की परिचालन ज़रूरतों में मदद करती हैं। RAS में समझौता ज्ञापनों और संस्थाओं की भूमिकाओं को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की बुनियादी बातों से जोड़कर पूछा जाता है।

स्रोत

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