RAS प्रश्न
बीटी कपास, भारत की एकमात्र अनुमोदित जीएम फसल, में कीट प्रतिरोध के लिए किस जीवाणु के जीन डाले गए हैं?
सही उत्तर: (B) बेसिलस थ्यूरिंजिएन्सिस।
बीटी कपास में कीट प्रतिरोध के लिए मृदा जीवाणु बेसिलस थ्यूरिंजिएन्सिस से प्राप्त क्राई जीन डाले गए हैं।
व्याख्या
बीटी कपास का नाम प्राकृतिक रूप से मिट्टी में पाए जाने वाले जीवाणु बेसिलस थ्यूरिंजिएन्सिस पर पड़ा है। इसमें इसी जीवाणु से लिए गए क्राई जीन, जैसे क्राई1एसी और क्राई2एबी, होते हैं। ये जीन क्राई यानी क्रिस्टल प्रोटीन बनाते हैं, जो हेलिकोवर्पा आर्मिजेरा जैसे बोलवर्म की सुंडियों के लिए विषैले होते हैं और पौधे को कीट-प्रतिरोधी बनाते हैं। इसलिए कीटनाशक जीन का स्रोत बेसिलस थ्यूरिंजिएन्सिस है; जीन पहुंचाने वाला वाहक, नाइट्रोजन स्थिर करने वाला जीवाणु या जैव नियंत्रण जीवाणु अलग भूमिका निभाता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की पत्रिका Agricultural Economics Research Review में प्रकाशित लेख भी बीटी कपास को बोलवर्म प्रतिरोध से जोड़ता है और इसे भारत में व्यावसायिक खेती के लिए अनुमत एकमात्र आनुवंशिक रूप से परिवर्तित फसल बताता है। भारत में बीटी कपास को 2002 में मंज़ूरी मिली थी।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमेफेसियन्स का उपयोग पौधों में जीन पहुंचाने वाले वाहक के रूप में किया जा सकता है, लेकिन यह बीटी कपास के कीटनाशक क्राई जीन का स्रोत नहीं है।
- (C) राइज़ोबियम लेग्यूमिनोसेरम फलीदार पौधों की जड़-ग्रंथियों में नाइट्रोजन स्थिर करता है, इसलिए बीटी कपास के बोलवर्म प्रतिरोध के लिए यह ज़िम्मेदार नहीं है।
- (D) स्यूडोमोनास फ्लोरेसेन्स कवक रोगजनकों के विरुद्ध जैव नियंत्रण कारक के रूप में जाना जाता है, जबकि बीटी कपास में प्रयुक्त कीटनाशक क्राई जीन बेसिलस थ्यूरिंजिएन्सिस से आते हैं।
अवधारणा
यह प्रश्न व्यावहारिक जैव प्रौद्योगिकी की समझ जांचता है: किसी फसल में डाला गया जीन उसे खास गुण कैसे देता है। आनुवंशिक रूप से परिवर्तित फसलें, जैव सुरक्षा, कृषि विज्ञान और भारत की नियामकीय स्थिति RAS में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रमुख विषय हैं।
