सात जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय सेना की मेजर अभिलाषा बराक को वर्ष 2025 के लिए प्रतिष्ठित संयुक्त राष्ट्र मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर बधाई दी, जिससे वे यह सम्मान पाने वाली तीसरी भारतीय शांतिरक्षक एवं तीसरी भारतीय सेना अधिकारी बन गई हैं। यह पुरस्कार उन्हें न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 5 जून 2026 को शांति अभियानों के अवर महासचिव ज्यां पियरे लैक्रोइक्स ने वरिष्ठ संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों एवं संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि की उपस्थिति में प्रदान किया। मेजर बराक वर्तमान में लेबनान स्थित संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) में तैनात हैं जहाँ वे भारतीय बटालियन की एंगेजमेंट टीम कमांडर एवं जेंडर फोकल पॉइंट के रूप में सेवा दे रही हैं। जून 2025 में कार्यभार संभालने के बाद से उन्होंने दक्षिण लेबनान में 539 जेंडर केंद्रित क्षेत्रीय गतिविधियों का रिकॉर्ड संचालन करते हुए 5000 से अधिक स्थानीय महिलाओं एवं किशोरियों को स्वास्थ्य शिविर, व्यावसायिक प्रशिक्षण, शिक्षा सत्र एवं मनोसामाजिक सहायता के माध्यम से सशक्त किया। उन्होंने लेबनान जेंडर पहल का नेतृत्व किया, जो एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता संचालित मंच है जिसने जेंडर आधारित हिंसा की गोपनीय रिपोर्टिंग एवं हेल्पलाइन तक पहुँच को संभव बनाया। हरियाणा के रोहतक की रहने वाली एवं एक सेवानिवृत्त कर्नल की बेटी मेजर बराक ने 2016 में दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और सेना वायु रक्षा कोर में कमीशन प्राप्त किया। मई 2022 में नासिक में कठोर कॉम्बैट आर्मी एविएशन प्रशिक्षण पूरा करके वे भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट एविएटर बनकर इतिहास रच चुकी हैं। यह पुरस्कार महिला, शांति एवं सुरक्षा संबंधी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 1325 के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है तथा संयुक्त राष्ट्र मिशनों में भारतीय महिला शांतिरक्षकों के योगदान को रेखांकित करता है।