वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में भारत के रूसी तेल खरीदने के अधिकार और अपने राष्ट्रीय हितों पर आधारित व्यापार नीति का बचाव किया। उनका मुख्य संदेश था कि भारत बाहरी दबाव, जल्दबाजी या समय-सीमा के दबाव में व्यापार समझौते नहीं करेगा। उन्होंने साफ कहा कि भारत बंदूक की नोक पर व्यापार सौदे नहीं करता। यह बयान उस समय आया जब पश्चिमी देश भारत पर रूसी तेल आयात घटाने का दबाव बना रहे थे और अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता भी चर्चा में थी।
परीक्षा की दृष्टि से यह मुद्दा केवल तेल आयात तक सीमित नहीं है। इसमें ऊर्जा सुरक्षा, विदेश नीति में रणनीतिक स्वायत्तता, व्यापार समझौते, टैरिफ दबाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बने वैश्विक आर्थिक दबाव जैसे विषय जुड़े हैं। भारत का तर्क है कि किसी देश से उत्पाद खरीदने का निर्णय राष्ट्रीय हित और घरेलू आर्थिक जरूरतों के आधार पर होना चाहिए। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका ने भारतीय आयात पर 50% टैरिफ लगाए थे और इसका एक कारण रूस से तेल खरीद को भी बताया गया। गोयल ने कहा कि भारत ऐसे दबाव से निपटने के लिए नए बाजारों और घरेलू मांग को मजबूत करने जैसे रास्ते देख रहा है।
RAS और UPSC के लिए यह समसामयिकी अंतरराष्ट्रीय संबंध, भारतीय अर्थव्यवस्था और शासन-प्रशासन के बीच का अच्छा जोड़ बनाती है। प्रारंभिक परीक्षा में बर्लिन ग्लोबल डायलॉग, रूसी तेल, टैरिफ और व्यापार वार्ता से जुड़े तथ्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में यह प्रश्न बन सकता है कि ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता के बीच भारत किस तरह संतुलन बनाता है। स्टैटिक जीके के लिहाज़ से यह राष्ट्रीय हित, विदेश व्यापार नीति और प्रतिबंधों के प्रभाव से जुड़ा विषय है।
