भारत ने 15 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय इंजीनियर दिवस मनाया, जो भारत के महान सिविल इंजीनियर और भारत रत्न विजेता सर एम. विश्वेश्वरैया (1861–1962) की 164वीं जयंती है। उन्होंने मैसूर राज्य में बांध निर्माण, सिंचाई प्रणाली और औद्योगिकीकरण में अमूल्य योगदान दिया।

सर विश्वेश्वरैया 1912 से 1918 तक मैसूर के दीवान रहे और कृष्णराज सागर (KRS) बांध के मुख्य इंजीनियर थे। इस अवसर पर सरकार ने भारत की उल्लेखनीय इंजीनियरिंग उपलब्धियां प्रस्तुत कीं।

भारत में अब DPIIT से मान्यता प्राप्त 1.59 लाख स्टार्टअप हैं। वैश्विक चिप डिजाइन इंजीनियरों का लगभग 20% हिस्सा भारत में है। ANRF के ज़रिए 1 लाख करोड़ रुपये अनुसंधान और विकास में लगाए जा रहे हैं। PMGSY के तहत 7.83 लाख किमी ग्रामीण सड़कें बनाई गई हैं — यह इंजीनियरिंग की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है जो हजारों गांवों को जोड़ती है।

सरकार ने अंतरिक्ष इंजीनियरिंग (ISRO), डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (आधार, UPI), रक्षा निर्माण और हरित ऊर्जा इंजीनियरिंग में भारत की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया। भारत का लक्ष्य 2047 तक विकसित भारत के तहत वैश्विक इंजीनियरिंग महाशक्ति बनना है।