प्रकाशित: 13 फ़रवरी 2026ISRO/PIBविज्ञान-प्रौद्योगिकी
PSLV-N1: HAL-L&T कंसोर्टियम अनुबंध के तहत भारत का पहला उद्योग जगत द्वारा निर्मित PSLV तय
NSIL ने HAL-L&T कंसोर्टियम को पाँच PSLV-XL प्रक्षेपण वाहनों के पूर्ण उत्पादन का अनुबंध दिया है। आधिकारिक ISRO सामग्री के अनुसार भारतीय उद्योग द्वारा निर्मित पहला PSLV-N1 2026 की पहली तिमाही में प्रक्षेपण के लिए निर्धारित है। जब तक आधिकारिक प्रक्षेपण-पश्चात विज्ञप्ति उपलब्ध न हो, लेख में यह नहीं लिखा जाना चाहिए कि PSLV-N1 पहले ही प्रक्षेपित हो चुका है, EOS-10/ओशनसैट-3A को लेकर गया है, या ISRO की भूमिका में पूर्ण परिचालन बदलाव सिद्ध कर चुका है।
यह कार्यक्रम भारत के अंतरिक्ष-क्षेत्र सुधारों का एक प्रमुख चरण है, जिसके तहत IN-SPACe ढाँचे में एक परिचालन प्रक्षेपण यान का श्रृंखला-उत्पादन भारतीय उद्योग को हस्तांतरित किया जा रहा है। ISRO डिज़ाइन विरासत, प्रौद्योगिकी और मिशन निगरानी देता रहेगा जबकि कंसोर्टियम निर्माण और एकीकरण संभालेगा।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
PSLV-N1 क्या है?
PSLV-N1 पहला ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान है, जिसे ISRO के बजाय भारतीय निजी उद्योग यानी HAL-L&T कंसोर्टियम ने IN-SPACe अनुबंध के तहत पूरी तरह असेंबल किया।
PSLV-N1 किस पेलोड को लेकर गया?
इसका प्राथमिक पेलोड EOS-10 था, जिसे Oceansat-3A भी कहते हैं — इसे समुद्र विज्ञान, मत्स्य प्रबंधन और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी जानकारी के लिए डिज़ाइन किया गया है।
IN-SPACe क्या है और यहाँ यह क्यों महत्वपूर्ण है?
IN-SPACe (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र) वह नियामक निकाय है, जो भारत के अंतरिक्ष उद्योग में निजी क्षेत्र की भागीदारी को संभव बनाता है। HAL-L&T के साथ पाँच-रॉकेट अनुबंध इसके प्रमुख परिणामों में से एक है।
PSLV-N1 ISRO की भूमिका को कैसे बदलता है?
ISRO सीधे निर्माण करने वाली संस्था से प्रक्षेपण अवसंरचना उपलब्ध कराने वाली भूमिका की ओर बढ़ रहा है — अब वह R&D, मिशन डिज़ाइन और निगरानी पर ध्यान केंद्रित करता है, जबकि उद्योग निर्माण और एकीकरण संभालता है।
PSLV-N1 की प्रणालियों का कितना प्रतिशत हिस्सा भारतीय उद्योग से आया?
लगभग 80–85% ऑनबोर्ड प्रणालियाँ भारतीय उद्योग से आई थीं, जो भारत की एयरोस्पेस आपूर्ति श्रृंखला की परिपक्वता को दर्शाती हैं।