18–19 फरवरी 2026 को भारत और यूनाइटेड किंगडम ने विजन 2035 ढाँचे और चौथे भारत-यूके ऊर्जा संवाद के तहत भारत-यूके अपतटीय पवन ऊर्जा टास्कफोर्स की औपचारिक शुरुआत की। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इसे 'ट्रस्टफोर्स' कहा, जो भारत-यूके स्वच्छ ऊर्जा सहयोग की रणनीतिक गहराई को रेखांकित करता है।

टास्कफोर्स तीन प्राथमिकता स्तंभों पर केंद्रित है: (1) पारिस्थितिकी तंत्र योजना और बाजार डिजाइन — समुद्री तल के पट्टे की व्यवस्था और राजस्व की निश्चितता के तंत्र; (2) बुनियादी ढांचा और आपूर्ति श्रृंखला — बंदरगाह आधुनिकीकरण और स्थानीय विनिर्माण; (3) वित्तपोषण और जोखिम शमन — मिश्रित वित्त से दीर्घकालिक संस्थागत पूंजी। गुजरात और तमिलनाडु तटों के पास अपतटीय पवन क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं। सरकार ने ₹7,453 करोड़ (लगभग 71 करोड़ पाउंड) की व्यवहार्यता अंतराल निधि मंजूर की है। भारत का 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा और 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य इस पहल को महत्वपूर्ण बनाता है।