प्रकाशित: 13 अक्टूबर 2025MoEFCC/DTEपर्यावरण
MoEFCC ने सभी राज्यों को संशोधित वन अग्नि प्रबंधन SOP जारी किए
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने 13 अक्टूबर 2025 को एक आदेश जारी कर सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को वन अग्नि प्रबंधन के लिए संशोधित मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOP) लागू करने का निर्देश दिया। ये संशोधित SOP देहरादून स्थित भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) ने तैयार की हैं।
संशोधित SOP पांच विशिष्ट वन प्रकारों पर लागू हैं: (1) उष्णकटिबंधीय नम पर्णपाती वन, (2) उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन, (3) उपोष्णकटिबंधीय चीड़ वन, (4) समशीतोष्ण और अल्पाइन वन, और (5) शुष्क और अर्ध-शुष्क झाड़ीदार वन। मध्य भारत और राजस्थान के शुष्क पर्णपाती वन शुष्क मौसम (फरवरी–मई) के दौरान विशेष रूप से जोखिम में रहते हैं।
SOP में वन अग्नि प्रबंधन चक्र के सभी चरण शामिल हैं: आग लगने से पहले रोकथाम (फायर ब्रेक, सामुदायिक गश्त), प्रारंभिक पहचान (FIRMS/VIIRS उपग्रह निगरानी), त्वरित प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल और आग के बाद पुनर्जनन।
राजस्थान के लिए ये SOP दो पारिस्थितिकी तंत्रों के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं: अरावली पर्वतमाला (शुष्क पर्णपाती और झाड़ीदार वन) और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के कांटेदार वन। राजस्थान का वन आवरण उसके भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 9.6% है — उदयपुर, चित्तौड़गढ़, बारां, कोटा और सवाई माधोपुर में प्रमुख वन क्षेत्र हैं। सरिस्का और रणथंभौर टाइगर रिजर्व मानवजनित आग के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं।
ICFRE SOP ऑस्ट्रेलिया के NFRS, कनाडा के CIFFC और EU के Copernicus EMS में अपनाई जाने वाली अच्छी व्यवस्थाओं के अनुरूप हैं। इनमें उपग्रह-आधारित पूर्व चेतावनी, सामुदायिक वन अग्नि प्रबंधन (CFFM) इकाइयां और अंतर-विभागीय समन्वय प्रोटोकॉल शामिल हैं।
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6-अक्ष वर्गीकरण
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ICFRE क्या है और इसका मुख्यालय कहां है?
ICFRE (भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद) भारत की शीर्ष वानिकी अनुसंधान संस्था है, जिसका मुख्यालय देहरादून, उत्तराखंड में है। यह MoEFCC के अंतर्गत कार्य करती है और वन अग्नि SOP सहित वन प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश तैयार करती है।
संशोधित MoEFCC अग्नि SOP में कितने वन प्रकार शामिल हैं?
संशोधित SOP में 5 वन प्रकार शामिल हैं: उष्णकटिबंधीय नम पर्णपाती, उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती, उपोष्णकटिबंधीय चीड़, समशीतोष्ण और अल्पाइन तथा शुष्क और अर्ध-शुष्क झाड़ीदार वन।
वन अग्नि प्रबंधन में FIRMS और VIIRS का उपयोग किसलिए होता है?
FIRMS और VIIRS उपग्रह-आधारित प्रणालियाँ हैं, जिनका उपयोग सक्रिय अग्नि हॉटस्पॉट की लगभग रीयल-टाइम पहचान के लिए किया जाता है। ये आग लगने के कुछ घंटों के भीतर वन विभागों को सतर्क कर त्वरित प्रतिक्रिया संभव बनाती हैं।
राजस्थान में कौन से वन आग के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं?
राजस्थान की अरावली पर्वतमाला (उदयपुर, चित्तौड़गढ़, कोटा जिलों में शुष्क पर्णपाती और झाड़ीदार वन) और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के कांटेदार वन आग के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं। सरिस्का और रणथंभौर टाइगर रिजर्व में मानवजनित आग का जोखिम अधिक है।
SOP में पूर्ण वन अग्नि प्रबंधन चक्र क्या है?
इसमें चार चरण हैं: (1) अग्नि-पूर्व रोकथाम — फायर ब्रेक, सामुदायिक गश्त; (2) प्रारंभिक पहचान — उपग्रह निगरानी, फायर वॉच टावर; (3) त्वरित प्रतिक्रिया — भूमि दल, हवाई सहायता; (4) अग्नि-पश्चात पुनर्जनन — पुनः बीजारोपण, मृदा स्थिरीकरण, जैव विविधता की पुनर्प्राप्ति।