17 अप्रैल 2026 को राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर से लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 की पराजय के बाद तीखा सार्वजनिक बयान जारी किया। यह विधेयक लोकसभा को 850 सीटों तक बढ़ाने और नई परिसीमन प्रक्रिया से जोड़कर 106वें संविधान संशोधन (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के तहत एक-तिहाई महिला आरक्षण लागू करना चाहता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 अप्रैल "एक ऐतिहासिक दिन होने वाला था, लेकिन कांग्रेस सहित विपक्ष ने इसे एक काले अध्याय में बदल दिया," और तर्क दिया कि इस आचरण से विपक्ष की वही मानसिकता उजागर होती है जिसका वे उल्लेख कर रहे थे। शर्मा ने कांग्रेस और व्यापक इंडिया गठबंधन की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने उस पहल का विरोध किया जिसे भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण की पहल के रूप में पेश कर रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि "जिन्होंने 70 वर्षों तक शासन किया उन्होंने महिलाओं के लिए कुछ नहीं किया" और विपक्ष के रुख को "वोट-बैंक राजनीति" तथा "परिवार-आधारित राजनीति" बताया, जो "साधारण परिवारों" की महिलाओं के उत्थान से डरती है। राजस्थान के मुख्यमंत्री ने इसे अपनी सरकार के समावेश और विकास के सिद्धांतों के विपरीत बताया। यह बयान दो कारणों से महत्वपूर्ण है: पहला, यह एक राज्य के मुख्यमंत्री को परिसीमन से जुड़े प्रतिनिधित्व सुधार पर राष्ट्रीय बहस में सीधे शामिल करता है; दूसरा, यह संकेत देता है कि भाजपा आगामी राज्य और आम चुनावों की ओर बढ़ते हुए विधेयक की पराजय को राजनीतिक मुद्दा बनाना चाहती है, उन राज्यों में भी जहाँ महिला मतदाता आधार निर्णायक रूप से बदला है।
17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में महिला आरक्षण संविधान संशोधन विधेयक की पराजय पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का तीखा बयान; इसे विपक्ष द्वारा बनाया गया "काला अध्याय" बताया
17 अप्रैल 2026 को राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक की हार पर विपक्ष की तीखी आलोचना की और इस दिन को "काला अध्याय" बताया। महिला आरक्षण को लोकसभा सीटों के विस्तार (543 से 850) और नए परिसीमन से जोड़ने वाला विधेयक 298-230 मतों से गिर गया, क्योंकि उसे दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला।
मुख्य तथ्य
- राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 की पराजय के बाद तीखा सार्वजनिक बयान जारी किया।
- शर्मा ने 17 अप्रैल 2026 को एक ऐसे दिन के रूप में वर्णित किया जो 'ऐतिहासिक दिन होने वाला था' लेकिन कांग्रेस सहित विपक्ष द्वारा 'काले अध्याय' में बदल दिया गया।
- पराजित विधेयक ने 106वें संविधान संशोधन (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के तहत एक-तिहाई महिला आरक्षण को लोकसभा 543 से 850 सीटों तक विस्तार और नई परिसीमन से जोड़ा था।
- मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और व्यापक इंडिया गठबंधन की आलोचना की कि उन्होंने उस का विरोध किया जिसे भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तहत महिला सशक्तिकरण पहल के रूप में स्थित किया था।
- उन्होंने अपनी सरकार के समावेश और विकास के घोषित सिद्धांतों की तुलना उस से की जिसे उन्होंने विपक्ष की 'वोट-बैंक राजनीति' कहा।
- हस्तक्षेप एक राज्य के मुख्यमंत्री को प्रतिनिधित्व और परिसीमन सुधार पर राष्ट्रीय बहस में सीधे रखता है।
- यह आगामी राज्य और आम चुनावों में विधेयक की पराजय को राजनीतिक मुद्दा बनाने के भाजपा के इरादे का संकेत देता है।
6-अक्ष वर्गीकरण
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राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक की पराजय पर बयान दिया। उसके संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मुख्यमंत्री ने 17 अप्रैल को ऐसा दिन बताया जो "ऐतिहासिक दिन होने वाला था", पर उसे "काले अध्याय" में बदल दिया गया। 2. पराजित विधेयक ने 106वें संविधान संशोधन के तहत एक-तिहाई महिला आरक्षण को लोकसभा की 850 सीटों तक वृद्धि और नए परिसीमन से जोड़ा था। 3. मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधित्व सुधार को परिसीमन से जोड़ने के विरुद्ध विपक्ष के तर्कों का समर्थन किया। उपरोक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
कथन 1 और 2 सही हैं। मुख्यमंत्री ने "काले अध्याय" की अभिव्यक्ति का उपयोग किया और विधेयक ने 106वें संविधान संशोधन के तहत महिला आरक्षण को लोकसभा विस्तार (543 से 850) और नई परिसीमन से जोड़ा था। कथन 3 गलत है: मुख्यमंत्री ने पराजय के लिए विपक्ष की तीखी आलोचना की और इसे महिला-विरोधी बताया, न कि उनके परिसीमन तर्कों का समर्थन किया।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 17 अप्रैल 2026 को क्या कहा?
उन्होंने कहा कि यह दिन ऐतिहासिक होने वाला था, लेकिन लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 की पराजय के बाद कांग्रेस सहित विपक्ष ने इसे काले अध्याय में बदल दिया।
पराजित विधेयक महिला आरक्षण के जिस प्रावधान को लागू करना चाहता था, उसका आधार कौन सा संविधान संशोधन था?
106वां संविधान संशोधन, 2023 — जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी कहा जाता है — ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया।
मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप राजनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
यह मौजूदा राज्य के मुख्यमंत्री को महिला आरक्षण को लोकसभा के विस्तार और परिसीमन से जोड़ने वाली राष्ट्रीय बहस में सीधे लाता है, और दिखाता है कि भाजपा आगामी चुनावों में इस पराजय को किस तरह पेश करने की योजना बना रही है।
मुख्यमंत्री के बयान की पृष्ठभूमि में कौन सा संसदीय परिणाम था?
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में 298-230 से पराजित हुआ; यह उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से कम था।
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