12 अप्रैल 2026 को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को कड़ा तीन-पंक्ति व्हिप जारी किया, जिसमें 16 से 18 अप्रैल 2026 तक निर्धारित तीन दिवसीय विशेष संसद सत्र के दौरान पूरे समय उपस्थित रहना अनिवार्य बताया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दोनों सदनों के नेताओं को व्यक्तिगत रूप से पत्र लिखकर इस विशेष सत्र की महत्ता और गंभीरता पर विशेष ज़ोर दिया है। यह सत्र वास्तव में बजट सत्र का ही विस्तार है और इसका मुख्य एजेंडा संविधान (एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम, 2023 में संशोधन करना है, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम से जाना जाता है और जो लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान करता है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8 अप्रैल 2026 को उन मसौदा विधेयकों को मंज़ूरी दी, जिनका मूल उद्देश्य महिला आरक्षण कोटे के कार्यान्वयन को 2027 की जनगणना पर आधारित लंबित परिसीमन प्रक्रिया से पूरी तरह अलग करना है। प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, आरक्षण 2011 की जनगणना के आधार पर लागू किया जाएगा और लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 कर दी जाएगी, जिनमें से 273 सीटें, यानी लगभग एक-तिहाई सीटें, महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी। इस नए ढाँचे को 31 मार्च 2029 तक लागू करने की योजना है, ताकि महिला आरक्षण कोटा अगले लोकसभा आम चुनावों के साथ-साथ ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और आंध्र प्रदेश की विधानसभा चुनावों में भी लागू हो सके। व्हिप की आधिकारिक सूचना में स्पष्ट रूप से कहा गया है, "सभी माननीय केंद्रीय मंत्री एवं सदस्य उपरोक्त तीनों तिथियों पर पूरे समय सदन में उपस्थित रहें; सदन में उपस्थिति पूर्णतः अनिवार्य है।" सरकार को इस संविधान संशोधन विधेयक को दोनों सदनों में सफलतापूर्वक पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी।
महिला आरक्षण संशोधन पर 16-18 अप्रैल के विशेष संसद सत्र के लिए भाजपा ने तीन-लाइन व्हिप जारी किया
भाजपा ने 12 अप्रैल 2026 को अपने सभी सांसदों के लिए तीन-पंक्ति व्हिप जारी किया, जिसके तहत 16-18 अप्रैल के विशेष संसद सत्र में उपस्थित रहना अनिवार्य है; इसमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन कर 2011 जनगणना के आधार पर 2029 तक महिला आरक्षण लागू करने के लिए लोकसभा की सीटें 816 की जाएँगी और महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित की जाएँगी।
मुख्य तथ्य
- 12 अप्रैल 2026 को भाजपा ने 16-18 अप्रैल को होने वाले संसद के विशेष सत्र में सांसदों की उपस्थिति के लिए तीन-लाइन व्हिप जारी किया
- सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (128वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2023) में संशोधन किया जाएगा
- संशोधन महिला कोटे को 2027 की जनगणना पर आधारित परिसीमन से अलग कर 2011 जनगणना के आधार पर लागू करेगा
- लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 816 की जाएँगी, जिनमें से 273 (लगभग एक-तिहाई) महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी
- लागू करने का लक्ष्य 31 मार्च 2029 है, जिससे अगले आम चुनाव भी इसके दायरे में आएँगे
- संविधान संशोधन के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होगा
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: 2011 की जनगणना के आधार पर महिला आरक्षण लागू करने और लोकसभा की संख्या 816 तक बढ़ाने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों के संवैधानिक महत्व का परीक्षण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
भाजपा ने 16-18 अप्रैल 2026 के विशेष संसद सत्र के लिए त्रि-पंक्तीय व्हिप जारी किया, जिसमें संविधान के 106वें संशोधन अधिनियम में संशोधन प्रस्तावित है। प्रस्तावित परिवर्तन महिला आरक्षण को 2027 जनगणना से अलग कर 2011 जनगणना पर आधारित करते हैं और लोकसभा को 816 सीटों तक बढ़ाकर 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करते हैं; इसका लक्ष्य मार्च 2029 तक कार्यान्वयन है।
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16-18 अप्रैल 2026 के संसद विशेष सत्र में चर्चित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रस्तावित संशोधन के अनुसार लोकसभा की कुल सीटों की संख्या कितनी होगी?
मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत मसौदा संशोधनों में लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव है। इनमें 273 सीटें, यानी लगभग एक-तिहाई, महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह व्यवस्था 2027 जनगणना पर आधारित परिसीमन की प्रतीक्षा किए बिना 2011 जनगणना के आँकड़ों पर लागू होगी।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत में महिला आरक्षण किस संविधान संशोधन से लाया गया था?
संविधान (एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम, 2023, जिसे मूलतः 128वें संशोधन विधेयक के रूप में प्रस्तुत किया गया था और नारी शक्ति वंदन अधिनियम कहा जाता है, लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान करता है।
16-18 अप्रैल के विशेष संसद सत्र की आवश्यकता क्यों है?
2023 के अधिनियम में ऐसा संशोधन करने के लिए कि महिला कोटा 2029 के आम चुनावों तक 2011 जनगणना के आधार पर लागू हो सके और लंबित 2027 जनगणना पर आधारित परिसीमन की प्रतीक्षा न करनी पड़े।
प्रस्तावित संशोधन में महिलाओं के लिए कितनी सीटें आरक्षित होंगी?
लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 की जाएँगी, जिनमें 273 सीटें (एक-तिहाई) महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
इस विधेयक को पारित करने के लिए कैसा बहुमत चाहिए?
संविधान संशोधन विधेयक होने के कारण इसे संसद के प्रत्येक सदन में उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित कराना आवश्यक है।
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