वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 मार्च 2026 को लोकसभा में कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक 2026 पेश किया। पेश होने के तुरंत बाद विधेयक को विस्तृत जांच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया गया।

विधेयक में दो प्रमुख कॉर्पोरेट कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव है: कंपनी अधिनियम, 2013 और सीमित देयता भागीदारी (LLP) अधिनियम, 2008। विधेयक का मुख्य उद्देश्य इन कानूनों के तहत छोटी प्रक्रियागत गलतियों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना और स्टार्टअप, छोटे व्यवसायों और उद्यमियों पर अनुपालन का बोझ कम करना है।

मौजूदा कंपनी अधिनियम 2013 के तहत फॉर्म देर से भरने या प्रक्रियागत चूक जैसी कई छोटी या तकनीकी गलतियों पर आपराधिक दायित्व बन जाता है। इन प्रावधानों की लंबे समय से आलोचना होती रही है। 2026 का संशोधन ऐसे अपराधों को सिविल दंड में बदलने का प्रयास करता है, ताकि वास्तविक और मामूली चूक पर आपराधिक मुकदमा न चले।

LLP अधिनियम 2008 के लिए भी इसी तरह का युक्तिसंगतकरण प्रस्तावित है। LLP भारत में छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप के लिए एक लोकप्रिय माध्यम है और छोटी गलतियों पर आपराधिक दंड कम करने से LLP ढांचा और आकर्षक बनेगा।

यह कदम भारत के व्यापक कारोबार सुगमता सुधारों के अनुरूप है। विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने से संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा विस्तृत जांच सुनिश्चित होती है।

यह विधेयक वैश्विक व्यापार वातावरण रैंकिंग में भारत की स्थिति सुधारने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में सहायक माना जा रहा है।