वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक 2026 को लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्यों सहित 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजने का प्रस्ताव रखा। JPC विधेयक के प्रावधानों की विस्तार से जाँच करेगी और अगले सत्र से पहले अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

यह विधेयक दो प्रमुख कॉर्पोरेट कानूनों — कंपनी अधिनियम 2013 और सीमित देयता भागीदारी (LLP) अधिनियम 2008 — में संशोधन का प्रस्ताव करता है। इसका मुख्य उद्देश्य इन अधिनियमों के तहत मामूली और तकनीकी अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना है, ताकि आपराधिक दंड के स्थान पर नागरिक जुर्माने का प्रावधान हो। इससे व्यवसायों, विशेषकर स्टार्टअप और छोटे उद्यमों पर अनुपालन का बोझ कम होगा।

विधेयक के प्रमुख प्रस्तावों में शामिल हैं: मामूली प्रक्रियागत उल्लंघनों के लिए कारावास हटाना; NCLT के तहत आंतरिक न्यायनिर्णयन तंत्र स्थापित करना; LLP के निगमन और विघटन प्रक्रियाओं को सुगम बनाना; और कॉर्पोरेट विवादों के तेज़ समाधान में मदद करना। कंपनी अधिनियम में संशोधन से संबंधित पक्ष लेनदेन और निजी प्रतिभूतियों के निजी नियोजन नियमों को भी सरल बनाने का प्रयास है।

JPC को विधेयक भेजना कॉर्पोरेट सुधारों पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने की सरकार की इच्छा दर्शाता है। यह सुधार वैश्विक मानकों के अनुरूप भारत के कॉर्पोरेट नियामक ढाँचे को प्रतिस्पर्धी बनाने के प्रयास का हिस्सा है।