प्रकाशित: 22 मार्च 2026PIBअर्थव्यवस्था
सरकार ने MSME विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए म्यूचुअल क्रेडिट गारंटी योजना में संशोधन किया
केंद्र सरकार ने MSME विनिर्माण क्षेत्र को बेहतर मदद देने के लिए म्यूचुअल क्रेडिट गारंटी योजना (MCGS) में संशोधन किया है। संशोधित योजना विनिर्माण गतिविधियों में लगे सूक्ष्म और लघु उद्यमों को अधिक क्रेडिट गारंटी कवरेज देती है, जिससे उनके लिए बिना गिरवी के बैंक ऋण लेना आसान होगा।
इस संशोधन से भारत भर में 2 लाख से अधिक MSMEs को लाभ होने की उम्मीद है, विशेषकर राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में जहां महत्वपूर्ण विनिर्माण क्लस्टर हैं। यह योजना मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत उद्देश्यों को प्राप्त करने के सरकार के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: विश्लेषण कीजिए कि संशोधित म्यूचुअल क्रेडिट गारंटी योजना एमएसएमई विनिर्माताओं के लिए बिना गिरवी ऋण की पहुँच कैसे मजबूत करती है तथा मेक इन इंडिया को कैसे बढ़ावा देती है।
उत्तर (50 शब्द):
केंद्र सरकार ने एमसीजीएस में संशोधन कर सूक्ष्म-लघु विनिर्माण उद्यमों के लिए बढ़ी हुई ऋण-गारंटी दी, जिससे बिना गिरवी बैंक ऋण लेना आसान होगा। इससे विशेषकर राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र समूहों में 2 लाख से अधिक एमएसएमई लाभान्वित होंगे और सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 30% योगदान देने वाले क्षेत्र में मेक इन इंडिया एवं आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा मिलेगा।
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
संशोधित म्यूचुअल क्रेडिट गारंटी योजना, एमसीजीएस, से कितने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को लाभ होने की उम्मीद है?
व्याख्या · सही उत्तर Cसंशोधित MCGS से भारत भर में 2 लाख से अधिक MSMEs को लाभ होने की उम्मीद है, विशेषकर राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
केंद्र सरकार ने परस्पर ऋण गारंटी योजना में बदलाव क्यों किया?
केंद्र सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विनिर्माण क्षेत्र को अधिक सहारा देने के लिए परस्पर ऋण गारंटी योजना में बदलाव किया।
संशोधित परस्पर ऋण गारंटी योजना सूक्ष्म और लघु विनिर्माताओं को क्या देती है?
संशोधित योजना विनिर्माण गतिविधियों में लगी सूक्ष्म और लघु इकाइयों को ऋण गारंटी का अधिक कवरेज देती है, जिससे उनके लिए बिना गिरवी बैंक ऋण लेना आसान होता है।
योजना में बदलाव से किन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को लाभ मिलने की उम्मीद है?
इस बदलाव से भारत भर में 2 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को लाभ मिलने की उम्मीद है, खासकर राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में, जहाँ महत्वपूर्ण विनिर्माण क्लस्टर हैं।
यह योजना सरकार के व्यापक उद्देश्यों और सकल घरेलू उत्पाद में योगदान से कैसे जुड़ी है?
यह योजना मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को हासिल करने के सरकार के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 30% योगदान देता है।