जवाहरलाल नेहरू पत्तन प्राधिकरण में बदली जा सकने वाली बैटरी वाले भारत के पहले इलेक्ट्रिक भारी ट्रकों के बेड़े को केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने रवाना किया। परीक्षा की दृष्टि से यह खबर केवल परिवहन तकनीक की नहीं, बल्कि हरित माल-ढुलाई, बंदरगाह आधुनिकीकरण और औद्योगिक सुधार से जुड़ी है। बंदरगाहों पर भारी ट्रकों का इस्तेमाल माल की आवाजाही में होता है, इसलिए डीजल आधारित तंत्र की जगह इलेक्ट्रिक ट्रक आने से उत्सर्जन घटाने और संचालन को साफ ऊर्जा की ओर ले जाने का संकेत मिलता है।
इस पहल की सबसे महत्वपूर्ण बात बदली जा सकने वाली बैटरी है। ऐसे ट्रकों में लंबी चार्जिंग रुकावट के बजाय बैटरी पैक बदला जा सकता है, जिससे बंदरगाह क्षेत्र में लगातार काम करने वाली माल-ढुलाई के लिए यह मॉडल उपयोगी बनता है। पहले बेड़े में 50 इलेक्ट्रिक भारी ट्रक शामिल हैं और जवाहरलाल नेहरू पत्तन प्राधिकरण का लक्ष्य 2026 तक अपने 600 ट्रकों के बेड़े का 90% इलेक्ट्रिक वाहन में बदलना है। यह लक्ष्य पूरा होने पर यह किसी भी भारतीय बंदरगाह पर सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक ट्रक बेड़ा बनेगा।
RAS और UPSC तैयारी में इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के औद्योगिक विकास, आर्थिक सुधार, हरित अवसंरचना और टिकाऊ माल-ढुलाई से जोड़ा जा सकता है। प्रीलिम्स में तथ्यात्मक सवाल स्थान, मंत्री, तकनीक और लक्ष्य पर आ सकते हैं। मुख्य परीक्षा में यह उदाहरण बंदरगाह-आधारित माल-ढुलाई में उत्सर्जन कटौती, ऊर्जा बदलाव और सार्वजनिक संस्थानों की हरित पहल को समझाने के लिए उपयोगी है। स्टैटिक जीके में इसे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, स्वच्छ परिवहन और भारत के हरित माल-ढुलाई लक्ष्यों से जोड़कर पढ़ना चाहिए।
