प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12 दिसंबर 2025 को ₹11,718.24 करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ भारत की जनगणना 2027 कराने की योजना को मंजूरी दी — यह भारतीय जनगणना में अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। 2027 की जनगणना भारत की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना होगी। इसमें डेटा संग्रह के लिए मोबाइल ऐप्लिकेशन (एंड्रॉयड और आईओएस पर उपलब्ध), निगरानी के लिए केंद्रीय पोर्टल और गणना की सटीकता बढ़ाने के लिए भू-स्थानिक मैपिंग का उपयोग किया जाएगा। जनगणना दो चरणों में होगी: चरण 1 — मकान सूचीकरण और आवास जनगणना (अप्रैल–सितंबर 2026) और चरण 2 — जनसंख्या गणना (फरवरी 2027)। लगभग 30 लाख क्षेत्र कार्यकर्ता तैनात किए जाएंगे। राजनीतिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान सभी समुदायों के लिए जाति गणना है — 1931 में ब्रिटिश भारत में हुई व्यापक जाति गणना के बाद यह पहली बार होगा। राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने अप्रैल 2025 में जाति गणना को मंजूरी दी थी। स्वयं-गणना विकल्प के तहत नागरिक पोर्टल पर अपना डेटा स्वयं भर सकेंगे। जनगणना 2027 का डेटा कल्याण योजनाओं, निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन और नीति-निर्माण में उपयोगी होगा।