23वाँ भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन 5 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में संपन्न हुआ। इसमें 2030 तक भारत-रूस आर्थिक सहयोग के रणनीतिक क्षेत्रों के विकास का कार्यक्रम अपनाया गया। इस व्यापक रूपरेखा में द्विपक्षीय व्यापार को 2024 के लगभग 68 अरब डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 100 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अगुवाई में हुए शिखर सम्मेलन में ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, कृषि और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों से जुड़े 16 अंतर-सरकारी समझौते और 15 समझौता ज्ञापन हुए। पुतिन ने अमेरिकी प्रतिबंध कानून CAATSA के तहत संभावित द्वितीयक प्रतिबंधों के बावजूद भारत को निर्बाध ईंधन आपूर्ति का आश्वासन दिया। प्रमुख बिंदुओं में एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं के उपयोग के लिए रसद सहायता के पारस्परिक आदान-प्रदान का समझौता (RELOS), कुशल भारतीय कामगारों को रूस भेजने की नई व्यवस्था, यूरेशियन आर्थिक संघ (EAEU) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की रूपरेखा और रूसी नागरिकों के लिए 30-दिवसीय निःशुल्क ई-पर्यटक वीजा का भारत का प्रस्ताव शामिल थे। संयुक्त वक्तव्य — 'रूस-भारत: विश्वास और पारस्परिक सम्मान पर आधारित, समय की कसौटी पर खरी उतरी प्रगतिशील साझेदारी' — में विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी की फिर पुष्टि की गई। शिखर सम्मेलन ने यह भी दिखाया कि भारत रूस से संबंध गहरे करने के साथ-साथ अमेरिका से मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत जारी रखकर अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए हुए है।