केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने रोगाणुरोधी प्रतिरोध पर राष्ट्रीय कार्य योजना 2.0 शुरू की। यह 2025-2029 की पांच वर्षीय योजना है और यह विश्व एएमआर जागरूकता सप्ताह से जुड़ी है। रोगाणुरोधी प्रतिरोध का मतलब है कि बैक्टीरिया, वायरस, फफूंद और परजीवी समय के साथ दवाओं पर पहले जैसा असर नहीं दिखाते; इससे संक्रमण का इलाज कठिन होता है और बीमारी फैलने, गंभीर बीमारी तथा मृत्यु का जोखिम बढ़ता है। इसलिए यह विषय केवल स्वास्थ्य क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन, अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक नीति से भी जुड़ता है।

योजना का मुख्य जोर निगरानी, एंटीमाइक्रोबियल दवाओं का बेहतर प्रबंधन और संक्रमण-रोकथाम रणनीतियों को मजबूत करने पर है। पीआईबी के अनुसार इसके तहत जागरूकता, शिक्षा और प्रशिक्षण, प्रयोगशाला क्षमता तथा स्वास्थ्य संस्थानों में संक्रमण नियंत्रण को मजबूत करने जैसी रणनीतियां शामिल हैं। जेपी नड्डा ने एंटीबायोटिक के अधिक और गलत इस्तेमाल को सुधारात्मक कदमों की जरूरत से जोड़ा। राष्ट्रीय कार्य योजना 2.0 पहले संस्करण की कमियों को दूर करने, एएमआर से जुड़े प्रयासों में स्वामित्व बढ़ाने, अंतर-क्षेत्रीय समन्वय मजबूत करने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर भी ध्यान देती है।

परीक्षा की दृष्टि से यह विषय विज्ञान-तकनीक, स्वास्थ्य नीति और समसामयिकी के संगम पर आता है। स्टैटिक जीके में इसे वन हेल्थ अप्रोच से जोड़ा जा सकता है, क्योंकि मानव स्वास्थ्य, पशुपालन, कृषि और पर्यावरण क्षेत्रों में अंतर-क्षेत्रीय समन्वय को जरूरी माना गया है। पीआईबी ने बताया कि योजना बनाने की प्रक्रिया 2022 में हितधारक परामर्शों से शुरू हुई और नीति आयोग में 20 से अधिक मंत्रालयों व विभागों की बैठकों के बाद आगे बढ़ी। RAS और UPSC में इससे प्रीलिम्स में योजना, अवधि और प्रमुख रणनीतियां पूछी जा सकती हैं, जबकि मुख्य परीक्षा में सार्वजनिक स्वास्थ्य, अंतर-क्षेत्रीय समन्वय और दवा-प्रतिरोधी संक्रमणों पर नीति-प्रतिक्रिया के रूप में इसका उपयोग किया जा सकता है।