11 फरवरी 2026 को दुनिया भर में विज्ञान में महिलाओं और बालिकाओं का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया गया। UNESCO मुख्यालय में हुए कार्यक्रम का विषय था, 'दृष्टि से प्रभाव तक: लिंग अंतर मिटाकर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) को नए सिरे से परिभाषित करना'। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2015 में प्रस्ताव A/RES/70/212 के तहत इस दिवस की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित तक पूरी और समान पहुँच दिलाना है।

भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने इस अवसर पर हाल में शुरू किए गए ‘महिलाओं को वैज्ञानिक उपलब्धियों और नवाचार की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने की प्रेरणा’ (WIDUSHI) कार्यक्रम की जानकारी दी। WIDUSHI का पूरा अंग्रेज़ी नाम ‘Women's Instinct for Developing and Ushering in Scientific Heights and Innovation’ है। वरिष्ठ महिला वैज्ञानिकों के लिए शुरू की गई इस विशेष फेलोशिप में प्रति माह ₹85,000 तक दिए जाते हैं। UNESCO के आँकड़ों के अनुसार, दुनिया भर के शोधकर्ताओं में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 33% है, जबकि भारत में यह लगभग 18% है। हालाँकि, उच्च शिक्षा में STEM पाठ्यक्रमों में बढ़ते दाखिलों के कारण हाल के वर्षों में महिलाओं की भागीदारी काफ़ी बढ़ी है।

भारत में महिला वैज्ञानिकों ने ISRO के चंद्रयान और गगनयान अभियानों में अहम भूमिका निभाई है। IIT जैसे प्रमुख संस्थानों में महिला निदेशकों की नियुक्ति भी हुई है। राजस्थान में मिशन बुनियाद और राजस्थान बालिका शिक्षा नीति स्कूल स्तर पर STEM में लिंग अंतर कम करने पर केंद्रित हैं। राज्य ने 2028 तक विज्ञान वर्ग में बालिकाओं का नामांकन 50% करने का लक्ष्य रखा है।