केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सहयोग से जनवरी 2026 में 25 फसलों की 184 नई उच्च उत्पादकता वाली, जलवायु-सहिष्णु किस्में जारी कीं। इनमें 60 किस्में धान की, 50 मक्के की, 24 कपास की और कई दलहन किस्में शामिल हैं — जैसे मसूर, चना और अरहर। ये किस्में सूखा, बाढ़ और तापमान वृद्धि को झेलते हुए बेहतर उत्पादन देने में सक्षम हैं। इस कदम का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, खाद्य तेल और दलहन के आयात पर निर्भरता घटाना और किसानों की आय बढ़ाना है। एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में, भारत 2024-25 में 15.018 करोड़ टन चावल उत्पादन के साथ पहली बार चीन को पछाड़कर विश्व का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बन गया। यह उपलब्धि उन्नत बीज किस्मों, सिंचाई के बेहतर विस्तार और कृषि विस्तार सेवाओं के कारण संभव हुई। नई कपास किस्मों से रेशे की गुणवत्ता और कीट प्रतिरोध में सुधार होगा, जिससे कीटनाशक लागत कम होगी। मक्के की नई किस्में पोल्ट्री फीड, एथेनॉल मिश्रण और स्टार्च उत्पादन के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। ICAR वैज्ञानिकों ने पारंपरिक प्रजनन, मार्कर-सहायित चयन और जैव प्रौद्योगिकी तकनीकों का उपयोग करके ये किस्में विकसित की हैं।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने 184 नई फसल किस्में जारी कीं
भारत ने 25 फसलों की 184 नई किस्में जारी कीं जिनमें 60 धान, 50 मक्का और 24 कपास शामिल हैं। भारत 15.018 करोड़ टन उत्पादन के साथ चीन को पछाड़कर विश्व का सबसे बड़ा चावल उत्पादक बना।
मुख्य तथ्य
- केंद्रीय कृषि मंत्रालय और ICAR ने 25 फसलों की 184 नई किस्में जारी कीं जिनमें 60 धान, 50 मक्का और 24 कपास की किस्में शामिल हैं।
- भारत 2024-25 में 15.018 करोड़ टन उत्पादन के साथ पहली बार चीन को पछाड़कर विश्व का सबसे बड़ा चावल उत्पादक बना।
- नई किस्में जलवायु-सहिष्णु हैं — सूखा, ताप और बाढ़ की स्थितियों में भी अधिक उत्पादन देने में सक्षम।
- कपास की किस्में रेशे की गुणवत्ता सुधारेंगी और कीटनाशकों की लागत कम करेंगी।
- मक्के की किस्में पोल्ट्री फीड, एथेनॉल और स्टार्च उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- राज्य कृषि विभागों को खरीफ और रबी सत्र के लिए शीघ्र बीज गुणन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
6-अक्ष वर्गीकरण
यह टॉपिक में दिखता है
स्रोत: PIB/ICAR
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जनवरी 2026 में केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने कितनी नई फसल किस्में जारी कीं?
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने ICAR के साथ मिलकर **25 फसलों की 184 नई किस्में** जारी कीं। इनमें 60 धान, 50 मक्का, 24 कपास और कई दलहन किस्में (मसूर, चना, अरहर) शामिल हैं। ये किस्में जलवायु के प्रति अधिक सहनशील हैं और उत्पादकता, कीट-प्रतिरोध तथा सूखे को सहने की क्षमता में बेहतर हैं।
भारत किस देश को पछाड़कर विश्व का सबसे बड़ा चावल उत्पादक बना?
भारत ने **चीन** को पछाड़कर 2024-25 में **15.018 करोड़ टन** चावल उत्पादन के साथ विश्व का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बनने का गौरव प्राप्त किया। यह उन्नत बीज किस्मों, बेहतर सिंचाई और कृषि विस्तार सेवाओं का परिणाम है।
नई किस्में खाद्य सुरक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?
184 नई किस्में खाद्य तेल और दलहन के **आयात पर निर्भरता घटाने**, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और **किसानों की आय बढ़ाने** में सहायक हैं। जलवायु के प्रति सहनशील गुण किसानों को अतिवृष्टि और सूखे से बचाने में मदद करते हैं।
मक्के की नई किस्में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?
नई **मक्के की किस्में** **पोल्ट्री फीड**, **एथेनॉल मिश्रण** (भारत के जैव ईंधन कार्यक्रम के तहत) और **स्टार्च उत्पादन** के लिए उपयोगी हैं। अधिक उत्पादन से आयात का दबाव कम होगा और ऊर्जा बदलाव के लक्ष्यों को बल मिलेगा।
ICAR ने ये किस्में किन तकनीकों से विकसित कीं?
ICAR वैज्ञानिकों ने पारंपरिक प्रजनन, मार्कर की सहायता से चयन और कुछ मामलों में जैव प्रौद्योगिकी तकनीकों से ये 184 किस्में विकसित कीं। इससे रोग प्रतिरोध, जलवायु सहनशीलता और उत्पादकता में सुधार हुआ।
क्या यह उपयोगी था?
सुधार या छूटा परीक्षा दृष्टिकोण संपादकीय टीम को भेजें।
प्रतिक्रिया भेजें