भारतीय संसद ने 17 दिसंबर 2025 को सबका बीमा सबकी रक्षा अधिनियम 2025 पारित किया और इसे 22 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति की अधिसूचना प्राप्त हुई। इस ऐतिहासिक कानून ने बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा 74% से बढ़ाकर 100% कर दी, जो उदारीकरण के बाद से भारत के बीमा क्षेत्र में सबसे व्यापक सुधार है।\n\nयह अधिनियम तीन मूलभूत कानूनों में संशोधन करता है: बीमा अधिनियम 1938, जीवन बीमा निगम (एलआईसी) अधिनियम 1956, और बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) अधिनियम 1999। इससे भारत के बीमा उद्योग को नियंत्रित करने वाली कानूनी रूपरेखा का व्यापक आधुनिकीकरण होता है।\n\nसबसे महत्वपूर्ण नवाचारों में से एक है पॉलिसीधारक शिक्षा और सुरक्षा कोष (पीईपीएफ) का निर्माण। यह एक समर्पित कोष है, जिसे बीमा ग्राहकों के हितों की रक्षा करने, पॉलिसीधारकों में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने और शिकायत निवारण के लिए एक व्यवस्थित तंत्र उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया है।\n\n100% एफडीआई उदारीकरण से बड़े वैश्विक बीमा समूहों के भारत में आने की उम्मीद है, जो पूंजी, अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाएँ और नए उत्पाद लाएंगे। भारत में बीमा पैठ लगभग 4% जीडीपी है, जो 7% के वैश्विक औसत से काफी कम है। यह अधिनियम 'बीमा त्रिनिटी' पहल का हिस्सा है।