भारत ने दादाभाई नौरोजी (जन्म: 4 सितंबर 1825) की 200वीं जयंती मनाई। वे भारतीय राष्ट्रवाद और आधुनिक आर्थिक चिंतन के प्रमुख आधार-स्तंभों में से एक थे। 'भारत के महान बुजुर्ग' के नाम से प्रसिद्ध नौरोजी पारसी बुद्धिजीवी, शिक्षाविद और राजनीतिक नेता थे। उनके योगदान ने प्रारंभिक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को दिशा दी।

नौरोजी को सबसे अधिक धन-निकास सिद्धांत (Drain of Wealth Theory) के लिए याद किया जाता है, जिसे उन्होंने अपनी ऐतिहासिक 1901 की पुस्तक 'पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' में प्रतिपादित किया। इस सिद्धांत के अनुसार ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों के कारण भारत के संसाधन, राजस्व और संपत्ति व्यवस्थित रूप से ब्रिटेन जा रहे थे, जिससे भारतीय जनता गरीब हो रही थी।

1892 में नौरोजी ने ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स में चुने जाने वाले पहले भारतीय बनकर इतिहास रचा। वे लिबरल पार्टी के सदस्य के रूप में फिन्सबरी सेंट्रल का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (स्थापना 1885) के संस्थापक पिता के रूप में उन्होंने तीन बार इसके अध्यक्ष के रूप में कार्य किया (1886, 1893, 1906)। उन्होंने बाल गंगाधर तिलक और गोपाल कृष्ण गोखले जैसे भावी नेताओं का मार्गदर्शन किया। 200वीं जयंती पर विभिन्न राजनीतिक वर्गों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।