नीति आयोग ने 4 सितंबर 2025 को अपनी महत्वपूर्ण "दलहन आत्मनिर्भरता" रिपोर्ट जारी की, जिसमें 2030 तक दालों के उत्पादन में पूर्ण आत्मनिर्भरता और विकसित भारत मिशन के तहत 2047 तक दाल उत्पादन को दोगुना करने का रोडमैप प्रस्तुत किया गया।
रिपोर्ट में पिछले एक दशक में भारत के दाल उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार को रेखांकित किया गया है। कुल दाल उत्पादन 16.35 MT से बढ़कर 26.06 MT हो गया — यानी 59.4% की वृद्धि — जबकि आयात निर्भरता 29% से घटकर मात्र 10.4% रह गई। यह परिवर्तन उच्च उपज वाली किस्मों को अपनाने, बेहतर सिंचाई सुविधाओं और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत बेहतर खरीद नीतियों से संभव हुआ है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उत्पादक और उपभोक्ता देश है। वैश्विक उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी लगभग 25% और वैश्विक खपत में 27% है। रिपोर्ट में कई संरचनात्मक चुनौतियाँ भी पहचानी गई हैं, जैसे वैश्विक औसत की तुलना में प्रति हेक्टेयर कम उत्पादकता, दाल उत्पादन का लगभग 80% वर्षा-आधारित क्षेत्रों पर निर्भर होना और मूल्य अस्थिरता।
राजस्थान को एक प्रमुख दाल उत्पादक राज्य के रूप में पहचाना गया है, जो मूंग, मोठ और चने के उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है। रिपोर्ट में 2030 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए MSP में वृद्धि, सूक्ष्म सिंचाई का विस्तार, अंतर-फसल पद्धति को बढ़ावा और कटाई के बाद के बुनियादी ढाँचे में निवेश की सिफारिश की गई है।
