भारत सरकार ने 29 जनवरी 2026 को कोकिंग कोल को खान और खनिज विकास एवं विनियमन अधिनियम, 1957 के तहत महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज के रूप में अधिसूचित किया। कोकिंग कोल इस्पात उद्योग के लिए मुख्य कच्चा माल है, क्योंकि ब्लास्ट फर्नेस रूट में इससे बनने वाला कोक ईंधन और अपचायक दोनों की भूमिका निभाता है। इसलिए यह निर्णय केवल खनन नीति का बदलाव नहीं है, बल्कि भारत की औद्योगिक सुरक्षा, आयात निर्भरता और इस्पात क्षेत्र की लागत से जुड़ा हुआ विषय है।

भारत के पास लगभग 37.37 अरब टन कोकिंग कोल संसाधन हैं, फिर भी इस्पात क्षेत्र की करीब 95% आवश्यकता आयात से पूरी होती है। इससे विदेशी मुद्रा का बड़ा बहिर्वाह होता है और इस्पात उद्योग बाहरी आपूर्ति पर निर्भर रहता है। अधिसूचना के बाद कोकिंग कोल को महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की सूची में रखा गया है, जिससे खोज, अनुमोदन और खनन गतिविधियों को प्राथमिकता देने का रास्ता मजबूत होता है। यह नीति-अपडेट छोटे तथ्य और बड़े आर्थिक तर्क, दोनों को साथ पढ़ने का अच्छा उदाहरण है।

परीक्षा की दृष्टि से यह विषय अर्थव्यवस्था, खनिज संसाधन, औद्योगिक नीति और आत्मनिर्भर भारत से जुड़ता है। प्रारंभिक परीक्षा में अधिनियम, खनिज का दर्जा, 37.37 अरब टन संसाधन और 95% आयात निर्भरता जैसे तथ्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इसे घरेलू विनिर्माण, इस्पात क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला, विदेशी मुद्रा बचत और रणनीतिक खनिज सुरक्षा के उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। स्टैटिक जीके में कोकिंग कोल और नॉन-कोकिंग कोल का अंतर, इस्पात उत्पादन में कोक की भूमिका और खनिज प्रशासन से जुड़े प्रावधानों से इसका सीधा संबंध बनता है।