जनवरी 2026 में कोकिंग कोल को खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज के रूप में अधिसूचित किया गया। परीक्षा की दृष्टि से यह केवल खनिज क्षेत्र की खबर नहीं है; यह भारत के इस्पात उद्योग, आयात निर्भरता, विदेशी मुद्रा बहिर्वाह और औद्योगिक आत्मनिर्भरता से जुड़ा विषय है। कोकिंग कोल इस्पात उत्पादन में ब्लास्ट फर्नेस पद्धति के लिए जरूरी कच्चा माल है। इसे कोक में बदला जाता है, जो ईंधन और अपचायक दोनों की भूमिका निभाता है। इसलिए स्टैटिक जीके में खनिज संसाधन, उद्योग और आर्थिक सुरक्षा पढ़ते समय यह अपडेट उपयोगी है।

भारत के पास लगभग 37.37 अरब टन कोकिंग कोल संसाधन हैं, फिर भी इस्पात क्षेत्र की करीब 95% जरूरत आयात से पूरी होती है। इसका मुख्य कारण यह है कि भारतीय कोकिंग कोल में राख की मात्रा अधिक मानी जाती है और इस्पात निर्माण में सीधे इस्तेमाल के लिए अक्सर बेहतर गुणवत्ता वाले कोल के साथ मिश्रण की जरूरत पड़ती है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार संसाधन मुख्य रूप से झारखंड में हैं, जबकि मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में भी अतिरिक्त संसाधन हैं। आयात निर्भरता 2020-21 में 5.12 करोड़ टन से बढ़कर 2024-25 में 5.758 करोड़ टन तक पहुंची।

इस अधिसूचना के बाद केंद्र सरकार ने अधिनियम की पहली अनुसूची में बदलाव करते हुए कोकिंग कोल को महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की सूची में शामिल किया। इससे खोज, खनन, गहरे भंडारों के विकास, मंजूरी प्रक्रिया और निजी निवेश को गति देने की नीति-गत गुंजाइश बढ़ती है। RAS और UPSC जैसी परीक्षाओं में इससे प्रीलिम्स में तथ्यात्मक प्रश्न और मुख्य परीक्षा में आयात निर्भरता, औद्योगिक नीति, खनिज सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और आत्मनिर्भर भारत पर विश्लेषणात्मक प्रश्न बन सकते हैं।