भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों — आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (AYUSH) — को दिसंबर 2025 के अंत में अंतिम रूप दिए गए दो ऐतिहासिक द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में औपचारिक मान्यता मिली: भारत-ओमान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) और भारत-न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA)। दोनों समझौतों में स्वास्थ्य-संबंधी सेवाओं और पारंपरिक चिकित्सा पर अलग अनुबंध हैं। भारत-ओमान CEPA ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पहला अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौता है जिसमें किसी देश ने आपूर्ति के सभी चार तरीकों में पारंपरिक चिकित्सा से जुड़ी प्रतिबद्धताएँ ली हैं। भारत-न्यूज़ीलैंड FTA में योग प्रशिक्षकों और अन्य AYUSH चिकित्सकों के लिए न्यूज़ीलैंड बाजार तक पहुँच के अवसर शामिल हैं। AYUSH और हर्बल उत्पादों का निर्यात 2023-24 में $64.92 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में $68.889 करोड़ हो गया। राजस्थान में बाड़मेर, नागौर और अरावली पट्टी आयुर्वेदिक विनिर्माण और हर्बल खेती के केंद्र हैं; इसलिए यह व्यापारिक मान्यता राज्य के लिए निर्यात बढ़ाने की ठोस संभावनाएँ पैदा करती है।