भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) की तकनीक हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को हस्तांतरित की है। IN-SPACe (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र) के ज़रिए हुआ यह 100वां प्रौद्योगिकी हस्तांतरण है। HAL 24 महीनों के भीतर स्वतंत्र रूप से SSLV का उत्पादन करेगा। SSLV तीन-चरणीय प्रक्षेपण यान है, जिसे निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में छोटे उपग्रहों की त्वरित और कम लागत वाली तैनाती के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत एक प्रमुख उपलब्धि है।
इसरो ने HAL को SSLV तकनीक हस्तांतरित की — IN-SPACe का 100वां प्रौद्योगिकी हस्तांतरण
इसरो ने HAL को SSLV तकनीक हस्तांतरित की, यह IN-SPACe का 100वां हस्तांतरण है। HAL 24 महीनों में स्वतंत्र रूप से SSLV का निर्माण करेगा।
मुख्य तथ्य
- ISRO ने HAL को SSLV (लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान) तकनीक हस्तांतरित की।
- IN-SPACe प्लेटफॉर्म से यह 100वां प्रौद्योगिकी हस्तांतरण है।
- HAL 24 महीनों में स्वतंत्र रूप से SSLV का निर्माण करेगा।
- यह हस्तांतरण अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाता है।
- SSLV वाणिज्यिक बाजार के लिए लघु उपग्रहों का किफायती प्रक्षेपण संभव बनाता है।
- IN-SPACe भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी क्षेत्र की भागीदारी को सुगम बनाता है।
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लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान, एसएसएलवी, कितने चरणों वाला प्रक्षेपण यान है और इसे किस कक्षा के लिए बनाया गया है?
एसएसएलवी एक तीन-चरणीय प्रक्षेपण यान है, जिसे निम्न भू-कक्षा (एलईओ) में लघु उपग्रहों को तेज़ी से और कम लागत पर भेजने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत के आत्मनिर्भर भारत प्रयास को बढ़ावा देता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
SSLV क्या है और HAL को ISRO का प्रौद्योगिकी हस्तांतरण क्यों महत्वपूर्ण है?
लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (SSLV) इसरो का नवीनतम प्रक्षेपण यान है, जिसे छोटे उपग्रहों (LEO में 500 किग्रा तक) के त्वरित और कम लागत वाले प्रक्षेपण के लिए तैयार किया गया है। IN-SPACe प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए HAL को SSLV तकनीक का हस्तांतरण 100वाँ हस्तांतरण है। इससे HAL 24 महीनों में स्वतंत्र रूप से SSLV बना सकेगा, इसरो पर निर्माण का बोझ घटेगा और भारत की वाणिज्यिक क्षमता बढ़ेगी।
IN-SPACe क्या है और भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में इसकी क्या भूमिका है?
IN-SPACe — भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र — 2020 में अंतरिक्ष विभाग के अधीन स्थापित किया गया था, ताकि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी क्षेत्र की भागीदारी को आसान बनाया, प्रोत्साहित किया और विनियमित किया जा सके। यह इसरो और उद्योग के बीच एकल-खिड़की प्राधिकरण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में मदद करने वाली संस्था के रूप में काम करता है। 100वाँ हस्तांतरण मील का पत्थर IN-SPACe की इसी भूमिका को रेखांकित करता है।
बड़े इसरो प्रक्षेपण यानों की तुलना में SSLV के वाणिज्यिक फायदे क्या हैं?
SSLV के महत्वपूर्ण वाणिज्यिक लाभ हैं: इसे 72 घंटों में असेंबल कर प्रक्षेपित किया जा सकता है, जबकि PSLV/GSLV में सप्ताह लगते हैं; प्रक्षेपण लागत काफी कम है (लगभग ₹290–330 करोड़, जबकि PSLV के लिए ₹500 करोड़ से अधिक); और इसके लिए केवल छह लोगों के छोटे दल की जरूरत होती है। ये विशेषताएँ इसे वाणिज्यिक पृथ्वी अवलोकन, संचार और IoT उपग्रह-समूहों के प्रक्षेपण के लिए आदर्श बनाती हैं।
SSLV-HAL हस्तांतरण अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर भारत मिशन को कैसे आगे बढ़ाता है?
HAL को SSLV प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण इसरो की प्रत्यक्ष भागीदारी के बिना घरेलू प्रक्षेपण यान निर्माण को संभव बनाकर आत्मनिर्भर भारत को सीधे आगे बढ़ाता है। रक्षा PSU HAL स्वतंत्र रूप से SSLV का निर्माण करेगा, जिससे अंतरिक्ष प्रक्षेपण प्रणालियों के लिए घरेलू उत्पादन क्षमता तैयार होती है। इससे विदेशी प्रक्षेपण सेवाओं पर निर्भरता कम होती है और HAL वैश्विक वाणिज्यिक अंतरिक्ष प्रक्षेपण निर्माता के रूप में उभरता है।
SSLV किस वैश्विक लघु उपग्रह बाजार को लक्षित कर रहा है?
वैश्विक लघु उपग्रह प्रक्षेपण बाजार 2030 तक $30 अरब से अधिक होने का अनुमान है। इसकी वृद्धि पृथ्वी अवलोकन, ब्रॉडबैंड इंटरनेट उपग्रह-समूहों, IoT कनेक्टिविटी और रक्षा उपग्रहों की माँग के कारण हो रही है। भारत की NSIL और Agnikul Cosmos, Skyroot जैसी निजी कंपनियाँ इसी बाजार पर ध्यान दे रही हैं। HAL द्वारा निर्मित SSLV SpaceX, Rocket Lab और अन्य से प्रतिस्पर्धा करेगा।
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