वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 24 अक्टूबर 2025 को बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में ऊर्जा व्यापार के मामले में भारत के राष्ट्रीय हित की मजबूती से पैरवी की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जर्मनी और ब्रिटेन ने स्वयं रूसी तेल प्रतिबंधों से छूट माँगी या हासिल की, तो भारत को रूसी कच्चे तेल के आयात पर अतिरिक्त 25% अमेरिकी शुल्क क्यों चुकाना पड़ रहा है? गोयल ने कहा: 'हम समय-सीमा या दबाव में सौदा नहीं करते।' उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति केवल राष्ट्रीय हित पर आधारित है। यह बयान ट्रम्प प्रशासन के उस दबाव के बीच आया है जिसमें भारत से रूसी तेल खरीद घटाने को कहा जा रहा है — इससे रणनीतिक स्वायत्तता और यूक्रेन संघर्ष पर ग्लोबल साउथ के रुख से जुड़े बड़े सवाल उठते हैं।