राजस्थान की 'रेगिस्तान का सुनहरा स्पर्श' शीर्षक वाली झाँकी, जो कला, साहित्य एवं संस्कृति विभाग द्वारा प्रस्तुत की गई, 26 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर 77वें गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हुई। यह झाँकी बीकानेर की सदियों पुरानी उस्ता कला से प्रेरित थी — एक पारंपरिक शिल्प जो ऊँट की खाल (चमड़े) पर जटिल सोने की जड़ाई के काम के लिए प्रसिद्ध है। 'उस्ताद' (प्रमुख शिल्पकार) समुदाय के नाम पर यह कला पीढ़ियों से की जा रही है और यह राजस्थान का एक भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्राप्त शिल्प है। कारीगर ऊँट के चमड़े, लकड़ी के बक्सों और लाख के सामान पर सोने की पत्ती (वरक) और प्राकृतिक रंगद्रव्यों का उपयोग करके विस्तृत लघु-शैली की चित्रकारी करते हैं। इस झाँकी को मायगव प्लेटफ़ॉर्म पर राष्ट्रव्यापी जनमत सर्वेक्षण की लोकप्रिय पसंद श्रेणी में तीसरा स्थान मिला — गुजरात पहले और उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर रहे।