भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-दिल्ली ने गुरुवार को जारी QS विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग 2027 में भारत के शीर्ष विश्वविद्यालय के रूप में अपना स्थान बरकरार रखा। यह संस्थान वैश्विक स्तर पर 118वें स्थान पर रहा, जो किसी भी भारतीय संस्थान के लिए सर्वोच्च है। इससे पहले भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-बॉम्बे वर्ष 2025 में 118वें स्थान पर आने वाला पहला भारतीय संस्थान बना था।
वैश्विक रैंकिंग में 52 भारतीय विश्वविद्यालय शामिल थे। इनमें से 26 ने अपनी रैंक सुधारी, नौ ने अपना स्थान बनाए रखा, 15 की रैंक गिरी तथा दो पहली बार सूची में आए। भारत के शीर्ष 10 में से सात विश्वविद्यालय भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान थे, जिनमें शीर्ष पाँच भी शामिल हैं। प्रति संकाय उद्धरण के मामले में 11 भारतीय विश्वविद्यालय विश्व के शीर्ष 100 में रहे, जो अनुसंधान की सघनता एवं मात्रा का माप है। भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु प्रति संकाय उद्धरण में वैश्विक स्तर पर 21वें स्थान पर रहा।
नियोक्ता प्रतिष्ठा के मामले में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-बॉम्बे विश्व में 32वें तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-दिल्ली 39वें स्थान पर रहा। यह माप 69,400 से अधिक नियोक्ताओं के QS सर्वेक्षण पर आधारित है।
हालाँकि रैंकिंग में कहा गया कि भारतीय विश्वविद्यालयों का शैक्षणिक प्रतिष्ठा अंक मामूली बना रहा। यह सूचक 1.2 लाख से अधिक शिक्षाविदों द्वारा संस्थानों के नामांकन पर आधारित है। शैक्षणिक प्रतिष्ठा 52 में से 8% विश्वविद्यालयों के लिए सुधरी तथा 28% के लिए घटी। वैश्विक अनुसंधान उत्पादन में भारत का हिस्सा बढ़कर लगभग 5.5% हो गया, जिससे यह मात्रा के आधार पर चीन एवं अमेरिका के बाद तीसरे स्थान पर है। QS ने जोर दिया कि केवल मात्रा से प्रतिष्ठा नहीं बढ़ती।
