प्रकाशित: 7 फ़रवरी 2026समाचार स्रोतविज्ञान-प्रौद्योगिकी
हरित हाइड्रोजन अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए भारत-नीदरलैंड हाइड्रोजन फेलोशिप शुरू, IIT के साथ MoU
6 फरवरी 2026 को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने नई दिल्ली में 'भारत-नीदरलैंड हाइड्रोजन फेलोशिप कार्यक्रम' शुरू किया और ग्रोनिंगेन विश्वविद्यालय (नीदरलैंड) तथा 19 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कराए। फेलोशिप का उद्देश्य शोधकर्ताओं को डच संस्थानों में काम का अवसर देकर हरित हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी में भारत की अनुसंधान क्षमता बढ़ाना है।
ग्रीन हाइड्रोजन — नवीकरणीय बिजली से पानी के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा उत्पादित — स्टील, सीमेंट, उर्वरक और भारी परिवहन जैसे उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां कार्बन उत्सर्जन घटाना कठिन है। भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (2023) का लक्ष्य 2030 तक 50 लाख मीट्रिक टन वार्षिक हरित हाइड्रोजन उत्पादन और लगभग 125 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता है। राजस्थान की व्यापक सौर क्षमता इलेक्ट्रोलाइजर-आधारित हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए राज्य को स्वाभाविक केंद्र बनाती है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन 2023 के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में भारत-नीदरलैंड हाइड्रोजन फेलोशिप और 19 IIT के समझौता ज्ञापन के रणनीतिक महत्व का विश्लेषण कीजिए तथा संभावित इलेक्ट्रोलाइज़र केंद्र के रूप में राजस्थान की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
6 फरवरी 2026 को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने भारत-नीदरलैंड हाइड्रोजन फेलोशिप शुरू की; ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय और 19 IIT के बीच समझौता ज्ञापन हुआ। यह राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन 2023 के 2030 तक 50 लाख टन वार्षिक उत्पादन और 125 गीगावाट नवीकरणीय क्षमता के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद करता है; राजस्थान संभावित सौर केंद्र है।
6-अक्ष वर्गीकरण
कवरेजअंतरराष्ट्रीयविषयविज्ञान-प्रौद्योगिकीपरीक्षाबेसिक कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · CET स्नातक · CET सीनियर सेकेंडरी · EO/RO · LDC · महिला पर्यवेक्षक · पटवार · PTI · RAS · REET · RPSC SI · स्कूल व्याख्याता · सीनियर कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · वरिष्ठ अध्यापक · UPSC · वनपाल · दोनोंस्रोतसमाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत-नीदरलैंड हाइड्रोजन फेलोशिप कार्यक्रम क्या है और इसे कब शुरू किया गया?
यह DST (विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग) द्वारा 6 फरवरी 2026 को ग्रोनिंगेन विश्वविद्यालय के साथ शुरू की गई एक द्विपक्षीय पहल है, जिसके तहत भारतीय और डच शोधकर्ता हरित हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी पर मिलकर काम करेंगे।
इस हाइड्रोजन पहल के तहत MoU पर किन संस्थाओं ने हस्ताक्षर किए?
नीदरलैंड के ग्रोनिंगेन विश्वविद्यालय और भारत के 19 IITs ने हरित हाइड्रोजन अनुसंधान के लिए फेलोशिप कार्यक्रम के अंतर्गत समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य क्या है और इसका वित्तीय परिव्यय कितना है?
जनवरी 2023 में स्वीकृत राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य 2030 तक 50 लाख मीट्रिक टन वार्षिक हरित हाइड्रोजन उत्पादन करना है, जिसके लिए ₹19,744 करोड़ का परिव्यय रखा गया है।
हरित हाइड्रोजन का उत्पादन कैसे होता है और इसे 'हरित' क्यों कहते हैं?
हरित हाइड्रोजन सौर या पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से बनी बिजली से जल के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा बनाया जाता है। इसे 'हरित' इसलिए कहते हैं क्योंकि इस प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन शून्य होता है।
भारत-नीदरलैंड विज्ञान सहयोग किस व्यापक द्विपक्षीय ढाँचे के तहत होता है?
हाइड्रोजन फेलोशिप सहित भारत-नीदरलैंड का वैज्ञानिक सहयोग दोनों देशों के विज्ञान और प्रौद्योगिकी (S&T) समझौते के तहत होता है। यह समझौता संयुक्त अनुसंधान और प्रौद्योगिकी सहयोग को औपचारिक रूप देता है।