6 फरवरी 2026 को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने नई दिल्ली में 'भारत-नीदरलैंड हाइड्रोजन फेलोशिप कार्यक्रम' शुरू किया और ग्रोनिंगेन विश्वविद्यालय (नीदरलैंड) तथा 19 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कराए। फेलोशिप का उद्देश्य शोधकर्ताओं को डच संस्थानों में काम का अवसर देकर हरित हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी में भारत की अनुसंधान क्षमता बढ़ाना है।

ग्रीन हाइड्रोजन — नवीकरणीय बिजली से पानी के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा उत्पादित — स्टील, सीमेंट, उर्वरक और भारी परिवहन जैसे उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां कार्बन उत्सर्जन घटाना कठिन है। भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (2023) का लक्ष्य 2030 तक 50 लाख मीट्रिक टन वार्षिक हरित हाइड्रोजन उत्पादन और लगभग 125 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता है। राजस्थान की व्यापक सौर क्षमता इलेक्ट्रोलाइजर-आधारित हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए राज्य को स्वाभाविक केंद्र बनाती है।