दूसरा WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन, 'रिस्टोरिंग बैलेंस: द साइंस एंड प्रैक्टिस ऑफ हेल्थ एंड वेल-बीइंग' शीर्षक से, 19 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली, भारत में संपन्न हुआ। भारत द्वारा आयोजित और WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर (GTMC) द्वारा संगठित इस शिखर सम्मेलन में 100 से अधिक देशों के 800 से अधिक प्रतिनिधि और 20 से अधिक देशों के मंत्री शामिल हुए, तथा 16,000 से अधिक ऑनलाइन पंजीकरण हुए। WHO महानिदेशक डॉ. टेड्रोस ने समापन भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार की प्रशंसा की। प्रमुख परिणामों में शामिल हैं: (1) दिल्ली घोषणापत्र — 26 सदस्य देशों द्वारा हस्ताक्षरित, जिसमें TCIM को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों में एकीकृत करने, साक्ष्य-आधारित नियमन को मजबूत करने और अनुसंधान में निवेश की प्रतिबद्धता है। (2) WHO पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक पुस्तकालय — 16 लाख संसाधनों को एकीकृत करने वाला पहला डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म। (3) WHO पारंपरिक चिकित्सा रणनीति 2025-2034 को आगे बढ़ाना। भारत ने गुजरात के जामनगर में WHO GTMC की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और AYUSH प्रणालियों (आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, योग, प्राकृतिक चिकित्सा) में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है।
दूसरा WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में संपन्न: 26 देशों ने दिल्ली घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए, WHO ने पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक पुस्तकालय लॉन्च किया
दूसरा WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन, 'रिस्टोरिंग बैलेंस: द साइंस एंड प्रैक्टिस ऑफ हेल्थ एंड वेल-बीइंग' शीर्षक से, 19 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली, भारत में संपन्न हुआ। भारत द्वारा आयोजित और WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर (GTMC) द्वारा संगठित इस शिखर सम्मेलन में 100 से अधिक देशों के 800 से अधिक प्रतिनिधि और 20 से अधिक देशों के मंत्री शामिल हुए, तथा 16,000 से अधिक ऑनलाइन पंजीकरण हुए। WHO महानिदेशक डॉ. टेड्रोस ने समापन भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार की प्रशंसा की। प्रमुख परिणामों में: (1) दिल्ली घोषणापत्र — 26 सदस्य देशों द्वारा हस्ताक्षरित, जिसमें TCIM को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों में एकीकृत करने, साक्ष्य-आधारित नियमन को मजबूत करने और अनुसंधान में निवेश की प्रतिबद्धता है। (2) WHO पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक पुस्तकालय — 16 लाख संसाधनों को एक जगह लाने वाला पहला डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म। (3) WHO पारंपरिक चिकित्सा रणनीति 2025-2034 को आगे बढ़ाना। भारत ने गुजरात के जामनगर में WHO GTMC की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और AYUSH प्रणालियों (आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, योग, प्राकृतिक चिकित्सा) में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है।
मुख्य तथ्य
- दूसरा WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन 19 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में संपन्न हुआ।
- 26 सदस्य देशों ने पारंपरिक चिकित्सा को स्वास्थ्य प्रणालियों में एकीकृत करने की दिल्ली घोषणा पर हस्ताक्षर किए।
- WHO ने 16 लाख संसाधनों को एक जगह जोड़ने वाला पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक पुस्तकालय लॉन्च किया।
- 100 से अधिक देशों के 800+ प्रतिनिधि और 16,000+ ऑनलाइन पंजीकरण हुए।
- भारत की AYUSH प्रणालियों को संहिताबद्ध पारंपरिक ज्ञान के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया।
- WHO का ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर (GTMC) गुजरात के जामनगर में स्थित है।
PYQप्रीलिम्स/PYQ दृष्टिकोण
- RAS 2024 'आयुष' (AYUSH) का पूर्ण रूप क्या है? — यह प्रश्न आयुष की पूर्ण अभिव्यक्ति पर आधारित है; यह लेख आयुष-केंद्रित पारंपरिक चिकित्सा नीति में भारत के वैश्विक नेतृत्व को गहराई से दर्शाता है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: दूसरे विश्व स्वास्थ्य संगठन वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन के भारत में आयोजन के महत्व पर चर्चा कीजिए तथा वैश्विक स्वास्थ्य कूटनीति के लिए दिल्ली घोषणापत्र के प्रमुख परिणामों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
19 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में दूसरे वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन में 26 देशों ने दिल्ली घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य तंत्र में एकीकृत करने का संकल्प लिया। डब्ल्यूएचओ ने 16 लाख संसाधनों का वैश्विक पुस्तकालय आरंभ किया, आयुष व जामनगर जीटीएमसी से भारत का नेतृत्व सुदृढ़ हुआ।
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दिसंबर 2025 में नई दिल्ली में हुए दूसरे WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन के बारे में कौन-सा कथन सही है?
दूसरा WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन 17 से 19 दिसंबर 2025 तक नई दिल्ली में हुआ और इसे WHO तथा भारत के आयुष मंत्रालय ने मिलकर आयोजित किया। इसकी थीम स्वास्थ्य और कल्याण में संतुलन बहाल करने पर थी। WHO के अनुसार दिल्ली घोषणा के समर्थन में 26 सदस्य देशों ने प्रतिबद्धताएं जताईं, जिनका जोर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा में पारंपरिक चिकित्सा के समावेशन, मजबूत नियमन, सुरक्षा मानकों, शोध और डेटा प्रणालियों पर था।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नई दिल्ली में आयोजित दूसरे WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन का विषय और प्रमुख परिणाम क्या थे?
दूसरे WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन का विषय 'रिस्टोरिंग बैलेंस: द साइंस एंड प्रैक्टिस ऑफ हेल्थ एंड वेल-बीइंग' था। यह 19 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में संपन्न हुआ। प्रमुख परिणाम थे: 26 सदस्य देशों ने पारंपरिक चिकित्सा को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों में शामिल करने वाली दिल्ली घोषणा पर हस्ताक्षर किए और WHO पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक पुस्तकालय का शुभारंभ हुआ, जिसमें डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर 16 लाख संसाधन एक जगह जोड़े गए हैं।
WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर (GTMC) क्या है और यह कहाँ स्थित है?
WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर (GTMC) विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा के साक्ष्य आधार, सुरक्षा और प्रभावशीलता को मजबूत करने के लिए स्थापित एक विशेष केंद्र है। यह गुजरात के जामनगर में स्थित है — भारतीय धरती पर पहला WHO केंद्र। इसे 2022 में WHO की पारंपरिक चिकित्सा रणनीति के तहत स्थापित किया गया था।
दिल्ली घोषणा क्या है और 26 हस्ताक्षरकर्ता देशों ने क्या प्रतिबद्धता ली?
दिल्ली घोषणा दिसंबर 2025 में दूसरे वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन में 26 WHO सदस्य देशों द्वारा हस्ताक्षरित एक बहुपक्षीय प्रतिबद्धता है। हस्ताक्षरकर्ता देशों ने अपनी राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों में पारंपरिक चिकित्सा को शामिल करने, साक्ष्य-आधारित सत्यापन में निवेश करने, गुणवत्ता और सुरक्षा मानक स्थापित करने और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के हिस्से के रूप में पारंपरिक चिकित्सा तक न्यायसंगत पहुँच बढ़ाने का वचन दिया।
AYUSH क्या है और इस शिखर सम्मेलन में भारत की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण थी?
AYUSH का अर्थ है आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी — भारत की संहिताबद्ध पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियाँ। पारंपरिक चिकित्सा में विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त नेतृत्व, स्थापित AYUSH मंत्रालय और जामनगर में WHO GTMC की उपस्थिति के कारण भारत दूसरे WHO वैश्विक शिखर सम्मेलन का मेजबान था। भारत की AYUSH प्रणालियों को संहिताबद्ध और बड़े पैमाने पर लागू किए जा सकने वाले पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया।
पारंपरिक चिकित्सा को स्वास्थ्य प्रणालियों में एकीकृत करना सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) से कैसे जुड़ा है?
सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी लोगों को बिना वित्तीय कठिनाई के गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ मिलें। पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियाँ प्रायः अधिक किफायती, स्थानीय रूप से उपलब्ध और सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य होती हैं, विशेषकर निम्न और मध्यम आय वाले देशों में। पारंपरिक चिकित्सा को स्वास्थ्य प्रणालियों में एकीकृत करने से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा की पहुँच बढ़ती है, जेब खर्च कम होता है और स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच की खाई पाटी जाती है — ये सभी UHC लक्ष्यों को आगे बढ़ाते हैं।
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