प्रकाशित: 5 दिसंबर 2025समाचार स्रोतशासन
SHANTI बिल 2025: परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 निरस्त होगा; निजी परमाणु ऊर्जा संचालकों को अनुमति
स्ट्रैटेजिक एंड होलिस्टिक अप्रोच टू न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी फॉर इंडिया (SHANTI) बिल, 2025, भारत के शीतकालीन संसद सत्र के दौरान एक महत्वपूर्ण विधायी कदम था। यह विधेयक परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 — 63 वर्षीय कानून — को निरस्त कर उसकी जगह ऐसा आधुनिक ढांचा लाना चाहता है, जिसमें निजी क्षेत्र को परमाणु ऊर्जा उत्पादन में भागीदारी की अनुमति मिले।
1962 के परमाणु ऊर्जा अधिनियम ने DAE और NPCIL को परमाणु ऊर्जा पर लगभग पूर्ण एकाधिकार दे रखा था। SHANTI बिल इस क्षेत्र को निजी संचालकों के लिए खोलने का प्रस्ताव करता है, जिसमें NPCIL के साथ संयुक्त उद्यम की शर्त और सख्त नियामक निगरानी शामिल है।
विधेयक का एक महत्वपूर्ण सुधार परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) को वैधानिक स्वतंत्रता देना है। वर्तमान में AERB DAE के अधीन काम करता है — इससे हितों के टकराव की संरचनात्मक स्थिति बनती है। SHANTI बिल इन भूमिकाओं को अलग करता है, जिससे भारत IAEA सुरक्षा मानकों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य अच्छी नियामक प्रथाओं के अनुरूप होगा।
विदेशी परमाणु संचालक — USA (वेस्टिंगहाउस, GE-हिताची), फ्रांस (EDF/फ्रामेटोम), रूस (रोसाटॉम), दक्षिण कोरिया (KEPCO) — अब NPCIL के साथ संयुक्त उद्यमों से भाग ले सकते हैं। भारत का लक्ष्य 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता हासिल करना है (विकसित भारत 2047), जो वर्तमान 7.5 GW से बहुत अधिक है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
SHANTI बिल 2025 का पूरा नाम क्या है?
SHANTI का अर्थ है Strategic and Holistic Approach to Nuclear Technology for India। यह विधेयक परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 को निरस्त करने और निजी क्षेत्र की भागीदारी की अनुमति देने का प्रस्ताव करता है।
SHANTI बिल AERB में क्या संरचनात्मक सुधार करता है?
SHANTI बिल AERB को DAE से वैधानिक स्वतंत्रता देता है, जो पहले परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देने और उसके नियमन, दोनों काम करता था — यह हितों के टकराव की संरचनात्मक स्थिति थी।
SHANTI बिल के तहत कौन-सी विदेशी परमाणु कंपनियां भारत में भाग ले सकती हैं?
वेस्टिंगहाउस (USA), EDF/फ्रामेटोम (फ्रांस), रोसाटॉम (रूस) और KEPCO (दक्षिण कोरिया) NPCIL के साथ JV से भाग ले सकती हैं।
2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता के लिए भारत का लक्ष्य क्या है?
विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के तहत भारत का लक्ष्य 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को मौजूदा 7.5 GW से बढ़ाकर 100 GW करना है।
परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 क्या था और इसे क्यों बदला जा रहा है?
परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 ने DAE और NPCIL को परमाणु ऊर्जा पर एकाधिकार दिया था। SHANTI बिल 2025 इसे आधुनिक ढांचे से बदलता है, जिसमें NPCIL JV के ज़रिए निजी और विदेशी भागीदारी की राह खुलती है।