स्ट्रैटेजिक एंड होलिस्टिक अप्रोच टू न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी फॉर इंडिया (SHANTI) बिल, 2025, भारत के शीतकालीन संसद सत्र के दौरान एक महत्वपूर्ण विधायी कदम था। यह विधेयक परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 — 63 वर्षीय कानून — को निरस्त कर उसकी जगह ऐसा आधुनिक ढांचा लाना चाहता है, जिसमें निजी क्षेत्र को परमाणु ऊर्जा उत्पादन में भागीदारी की अनुमति मिले।

1962 के परमाणु ऊर्जा अधिनियम ने DAE और NPCIL को परमाणु ऊर्जा पर लगभग पूर्ण एकाधिकार दे रखा था। SHANTI बिल इस क्षेत्र को निजी संचालकों के लिए खोलने का प्रस्ताव करता है, जिसमें NPCIL के साथ संयुक्त उद्यम की शर्त और सख्त नियामक निगरानी शामिल है।

विधेयक का एक महत्वपूर्ण सुधार परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) को वैधानिक स्वतंत्रता देना है। वर्तमान में AERB DAE के अधीन काम करता है — इससे हितों के टकराव की संरचनात्मक स्थिति बनती है। SHANTI बिल इन भूमिकाओं को अलग करता है, जिससे भारत IAEA सुरक्षा मानकों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य अच्छी नियामक प्रथाओं के अनुरूप होगा।

विदेशी परमाणु संचालक — USA (वेस्टिंगहाउस, GE-हिताची), फ्रांस (EDF/फ्रामेटोम), रूस (रोसाटॉम), दक्षिण कोरिया (KEPCO) — अब NPCIL के साथ संयुक्त उद्यमों से भाग ले सकते हैं। भारत का लक्ष्य 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता हासिल करना है (विकसित भारत 2047), जो वर्तमान 7.5 GW से बहुत अधिक है।