सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) अधिनियम, 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 20 दिसंबर 2025 को स्वीकृति दी। इससे पहले लोकसभा ने इसे 17 दिसंबर और राज्यसभा ने 18 दिसंबर को पारित किया था। इस अधिनियम ने परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 को निरस्त कर भारत के परमाणु कानूनी ढाँचे को छह दशकों में पहली बार एकीकृत किया। इस ऐतिहासिक सुधार के तहत भारतीय निजी कंपनियाँ और सरकारी संस्थाओं के साथ उनके संयुक्त उद्यम परमाणु ऊर्जा उत्पादन, परमाणु ईंधन प्रबंधन और उपकरण निर्माण के लिए लाइसेंस ले सकेंगे। परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) को वैधानिक मान्यता दी गई है। यह कानून 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता और '2070 तक नेट जीरो' लक्ष्य के अनुरूप है। संसद के शीतकालीन सत्र 2025 में कुल 8 विधेयक पारित हुए।