प्रकाशित: 28 फ़रवरी 2026OvertDefense / BharatShakti / Subkuzटॉपिक
INS अंजदीप चेन्नई में कमीशन: उथले पानी में पनडुब्बी-रोधी युद्ध के लिए बना भारत का तीसरा स्वदेशी युद्धपोत बेड़े में शामिल
भारतीय नौसेना ने 27 फरवरी 2026 को चेन्नई पोर्ट में एक समारोह में INS अंजदीप को औपचारिक रूप से कमीशन किया, जिसकी अध्यक्षता नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने की। INS अंजदीप भारत के स्वदेशी एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW SWC) कार्यक्रम के तहत बेड़े में शामिल होने वाला तीसरा पोत है — आठ पोतों की श्रृंखला का हिस्सा।
कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा निर्मित, इस पोत में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री है — जिसमें स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) से संरचनात्मक इस्पात शामिल है। उन्नत सोनार प्रणालियों, पनडुब्बी-रोधी टॉरपीडो और स्वदेशी कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से सुसज्जित, INS अंजदीप तटीय और उथले जल क्षेत्रों में पनडुब्बी-रोधी अभियानों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है। इसका नाम कर्नाटक के करवार के पास स्थित अंजदीप द्वीप से लिया गया है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: 27 फरवरी 2026 को चेन्नई में आईएनएस अंजदीप के कमीशन होने का रणनीतिक एवं तकनीकी महत्व, विशेष रूप से आत्मनिर्भर भारत तथा भारत के स्वदेशी पनडुब्बी-रोधी उथले जल युद्धपोत कार्यक्रम के संदर्भ में, रेखांकित कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
आईएनएस अंजदीप, भारत का तीसरा स्वदेशी पनडुब्बी-रोधी उथले जल युद्धपोत, 27 फरवरी 2026 को चेन्नई बंदरगाह पर एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी द्वारा कमीशन किया गया। आठ पोतों की श्रृंखला का यह पोत गार्डन रीच शिपबिल्डर्स कोलकाता ने 80% से अधिक स्वदेशी अंश और सेल इस्पात से बनाया है; यह आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
INS अंजदीप क्या है और इसे कब सेवा में शामिल किया गया?
INS अंजदीप भारत का तीसरा स्वदेशी पनडुब्बी-रोधी युद्धक (ASW) उथले जल पोत है। इसे 27 फरवरी 2026 को चेन्नई में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी द्वारा नौसेना में शामिल किया गया।
INS अंजदीप का निर्माण किस शिपयार्ड ने किया और इसमें स्वदेशी सामग्री कितनी है?
INS अंजदीप का निर्माण कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने किया। इस पोत में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री है, जो आत्मनिर्भर भारत रक्षा विनिर्माण कार्यक्रम की एक बड़ी उपलब्धि है।
ASW उथले जल पोत की भारतीय नौसेना में क्या भूमिका है?
ASW (पनडुब्बी-रोधी युद्ध) उथले जल पोत ऐसे विशेष जहाज हैं, जिन्हें तटीय और उथले जल में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने, उन पर नजर रखने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए बनाया गया है। इससे भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा मजबूत होती है।
हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की ASW क्षमता रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
चीन हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी पनडुब्बियों की मौजूदगी बढ़ा रहा है, जो भारत के लिए रणनीतिक चुनौती है। INS अंजदीप जैसे पोतों से भारत की ASW क्षमता बेहतर होती है और उसे अपने समुद्री परिवेश में पानी के भीतर मौजूद खतरों की निगरानी करने और उन्हें रोकने में मदद मिलती है।
भारत के रक्षा जहाज निर्माण में GRSE का क्या महत्व है?
कोलकाता का गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) भारतीय नौसेना और तट रक्षक दोनों के लिए युद्धपोत बनाने वाला भारत का एकमात्र सरकारी शिपयार्ड है। INS अंजदीप GRSE का 115वाँ युद्धपोत है और सिर्फ 2025 में उसने पाँच युद्धपोत सौंपे — जो भारतीय नौसैनिक इतिहास में एक रिकॉर्ड है।