केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 31 दिसंबर 2025 को दो बड़े बुनियादी ढांचा प्रस्तावों को मंजूरी दी। पहला प्रस्ताव महाराष्ट्र में नासिक-सोलापुर-अक्कलकोट कॉरिडोर से जुड़ा है। यह 374 किलोमीटर लंबा 6-लेन राजमार्ग होगा और इसकी स्वीकृत लागत ₹19,142 करोड़ है। दूसरा प्रस्ताव ओडिशा में राष्ट्रीय राजमार्ग-326 के चौड़ीकरण का है, जिसकी लागत ₹1,526.21 करोड़ है। दोनों परियोजनाओं को 24 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

इन मंजूरियों का महत्व केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है। इन्हें प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप रखा गया है, जिसका ज़ोर अलग-अलग परिवहन साधनों को बेहतर तरीके से जोड़ने और बुनियादी ढांचे की एक साथ योजना बनाने पर है। इसलिए परीक्षा की दृष्टि से यह विषय शासन, भारतीय अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचा योजना से जुड़ता है। नासिक-सोलापुर-अक्कलकोट कॉरिडोर में स्थान, लंबाई, लेन और लागत जैसे सीधे तथ्य प्रारंभिक परीक्षा के लिए उपयोगी हैं। ओडिशा में राष्ट्रीय राजमार्ग-326 चौड़ीकरण की लागत और 24 महीनों की समयसीमा भी तथ्यात्मक प्रश्नों में पूछी जा सकती है।

मुख्य परीक्षा के लिए इस अपडेट को केंद्र सरकार की परियोजनाओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया, राष्ट्रीय राजमार्ग विकास और बहु-मॉडल कनेक्टिविटी के संदर्भ में पढ़ना चाहिए। यह विषय स्टैटिक जीके से भी जुड़ता है — राष्ट्रीय राजमार्गों, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, सार्वजनिक निवेश और आर्थिक गतिविधियों में परिवहन ढांचे की भूमिका के ज़रिए। RAS और UPSC जैसी परीक्षाओं में ऐसे फैसले अक्सर समसामयिकी को अर्थव्यवस्था और शासन के स्थायी हिस्सों से जोड़कर पूछे जाते हैं। इन दोनों मंजूरियों को साथ पढ़ने से महाराष्ट्र के कॉरिडोर उदाहरण और ओडिशा के राष्ट्रीय राजमार्ग उदाहरण को एक ही परीक्षा संदर्भ में व्यवस्थित किया जा सकता है।