13 सितंबर 2025 की रिपोर्ट में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) द्वारा भारत में हिरासत में हुई मौतों पर जारी आंकड़ों का उल्लेख किया गया। NHRC ने 2024 में लगभग 2,739 हिरासत मौतें दर्ज कीं, जबकि 2023 में ~2,400 थीं। राजस्थान में दो वर्षों में 20 हिरासत मौतें दर्ज की गईं। ये आंकड़े पुलिस जवाबदेही, हिरासत में यातना और डी.के. बासु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के पालन को लेकर गंभीर चिंताएं उठाते हैं। नागरिक समाज संगठनों ने पूछताछ की अनिवार्य वीडियो-रिकॉर्डिंग और पुलिस लॉकअप की स्वतंत्र निगरानी की मांग की है।
भारत में हिरासत में मौतें: NHRC डेटा से जवाबदेही पर सवाल
13 सितंबर 2025 की रिपोर्टिंग में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) द्वारा भारत में हिरासत में मौतों पर जारी आंकड़ों का उल्लेख किया गया। NHRC ने 2024 में लगभग 2,739 हिरासत मौतें दर्ज कीं, जबकि 2023 में ~2,400 थीं। राजस्थान में दो वर्षों में 20 हिरासत मौतें दर्ज की गईं। ये आंकड़े पुलिस जवाबदेही, हिरासत में यातना और डी.के. बासु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के पालन को लेकर गंभीर चिंताएं उठाते हैं। नागरिक समाज संगठनों ने पूछताछ की अनिवार्य वीडियो-रिकॉर्डिंग और पुलिस लॉकअप की स्वतंत्र निगरानी की मांग की है।
मुख्य तथ्य
- NHRC ने 2024 में भारत में लगभग 2,739 हिरासत में मौतें दर्ज कीं।
- पिछले वर्ष (2023) में हिरासत में लगभग 2,400 मौतें रिपोर्ट हुईं।
- राजस्थान में दो साल की अवधि में हिरासत में 20 मौतें दर्ज की गईं।
- इस डेटा से पुलिस जवाबदेही और हिरासत में यातना को लेकर चिंताएं सामने आती हैं।
- डी.के. बासु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लेख किया गया।
- नागरिक समाज ने पूछताछ की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य करने की मांग की।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
NHRC ने 2024 में भारत में हिरासत में कितनी मौतें दर्ज कीं और 2023 से तुलना कैसी है?
NHRC ने 2024 में भारत में हिरासत में लगभग 2,739 मौतें दर्ज कीं, जो 2023 की लगभग 2,400 मौतों से अधिक हैं। यह बढ़ता रुझान पुलिस जवाबदेही और हिरासती दुर्व्यवहार के विरुद्ध मौजूदा सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता पर चिंताएं बढ़ाता है।
डी.के. बासु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख दिशा-निर्देश क्या हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने डी.के. बासु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (1997) में गिरफ्तारी के लिए अनिवार्य प्रक्रियात्मक आवश्यकताएं तय कीं — लिखित गिरफ्तारी मेमो, परिजनों को सूचना, हिरासत से पहले और बाद चिकित्सा जांच, और यातना का निषेध। इन दिशा-निर्देशों को CrPC और बाद में BNSS से वैधानिक बल दिया गया।
NHRC डेटा के अनुसार राजस्थान में हिरासत में मौतों का रिकॉर्ड कैसा है?
NHRC डेटा के अनुसार राजस्थान में रिपोर्ट में शामिल दो वर्षों की अवधि में हिरासत में 20 मौतें दर्ज हुईं। नागरिक समाज राज्य-स्तरीय पुलिस जवाबदेही का आकलन करने और हिरासत से जुड़ी प्रक्रियाओं में सुधार के लिए इस आंकड़े का उपयोग करता है।
भारत में हिरासत में मौतों को कम करने के लिए नागरिक समाज ने किन सुधारों की मांग की है?
नागरिक समाज संगठनों ने सभी पूछताछ की अनिवार्य वीडियो-रिकॉर्डिंग, पुलिस लॉक-अप की स्वतंत्र निगरानी, हर हिरासत मौत में त्वरित दंडाधिकारी जांच, प्रकाश सिंह दिशा-निर्देशों के तहत पुलिस सुधार और UN कन्वेंशन अगेंस्ट टॉर्चर के अनुमोदन की मांग की है।
NHRC क्या है और हिरासत मौत के मामलों में इसके पास क्या शक्तियां हैं?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत स्थापित एक वैधानिक संस्था है। हिरासत मौत के मामलों में राज्य सरकारें 24 घंटे के भीतर NHRC को रिपोर्ट भेजने के लिए बाध्य हैं। NHRC मुआवजे की सिफारिश कर सकता है, कार्यवाही शुरू कर सकता है और न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है — लेकिन इसकी सिफारिशें बाध्यकारी नहीं हैं, जिसे आलोचक इसकी सीमा मानते हैं।
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